अबके ये कैसा वसंत है !"
आँसुओं का पतझड़ है,
जज़्बातों के फूल हैं,
बहुत रोया वसंत है,
अबके ये कैसा वसंत है !
हर पलक भीगी-भीगी,
हर शाम खोई-खोई,
दूर हमसे वसंत है,
अबके ये कैसा वसंत है !
दिल ठहरा हुआ है,
कारवां चलता रहा,
वहीं रह गया वसंत है,
अबके ये कैसा वसंत है !
नीले आसमां के नीचे,
गर्द भरे सर्द थपेड़े हैं,
मुरझाया वसंत है,
अबके ये कैसा वसंत है !
*✒विनोद*