अपनी जमीन में ही कीट पतंगों को नष्ट करे-डॉ. बलराज से नष्ट कर सकते है कीटो को, तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने बताये तरीके

 धूप से नष्ट कर सकते है कीटो को, तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने बताये तरीके


खरगोन -  दो दिवसीय चिली फेस्टिवल के तकनीकी सत्र में देश की शोध संस्थानों से आए बागवानी वैज्ञानिकों से अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं को लेकर किसान रूबरू हुए। इस दौरान किसानों ने अपनी जिज्ञासाएं भी शांत की। साथ ही कई किसानों ने कीट पतंगों सहित वायरस पर लगाम कसने के लिए प्रश्न भी किए। इस तकनीकी सत्र में जिले व अन्य जिले के मिर्च उत्पादक किसानों और एक्सपोर्टरों ने आपसी बातचीत करते हुए समस्याओं का समाधान किया। डॉ. बलराज ने किसान के जवाब में कहा कि अधिकतर कीट जमीन में ही मौजूद होते है, जो नमी पाकर अपना जीवन बनाए रखते है, जो पौध तैयार होने के समय से ही सक्रिय हो जाते है। इनको धूप से ही खत्म किया जा सकता है। किसी पेस्टिसाईड की जरूरत नही है। किसान मईजून में दो से तीन बार अच्छी तरह गहरी जुताई कर ले तो, 75 प्रतिशत तक समस्याओं से बच सकता है। तकनीकी सत्र के दौरान कृषि मंत्री श्री सचिन यादव भी मौजूद रहे, जो किसान, एक्सपोर्टर और वैज्ञानिकों के बीच के संवाद पर नजरे बनाए रखे। तकनीकी सत्र में उद्यानिकी आयुक्त श्री एम. काली दुराई और विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। आदर्श पौधशाला और ग्रीन हॉउस बनाने के तरीके भी सुझाएं तकनीकी सत्र के दौरान वैज्ञानिकों ने एक तरफ किसानों के सवालों के जवाब भी दिए। साथ ही उन्होंने उद्यानिकी फसलों के लिए तैयार की जाने वाली आदर्श पौधशाला और ग्रीन हॉउस का निर्माण और उसके उपयोग के बारे में जानकारी दी। वैज्ञानिक श्री बलराज ने बताया कि ग्रीन हॉउस में जो कीट आते है वो जमीन से ही आते है। अगर गहरी जुताई की होगी तो यह संभावना नही होगी। ग्रीन हाउस फसलों के लिए आईसीयू की तरह होनी चाहिए। इसमे दो दरवाजे बड़े काम के होते है। तकनीकी सत्र में बालाजी एग्रो ऑर्गेनिक के श्री जगदीश ने कहा कि गल्फ देशों में भारतीय फसलों की बड़ी मांग है। अगर यहां चिली के स्टॉल लगाए जाए, तो वहां चिली के साथ-साथ अन्य फसलों का भी बाजार विकसित हो सकता है। भोपाल के अधिकारी ने बताया कि देश के बाहर विभाग द्वारा ऐसे 12 स्टॉल या केंद्र बनाए गए है, जो भारतीय फसलों की मांग को समझते है। गल्फ देशों में भी बढ़ाया जाएगा। दूसरे दिन भंडारण और पैकेजिंग के साथ जैविक उत्पादन के बारे में जानेंगे दो दिवसीय चिली फेस्टिवल के दूसरे दिन आज रविवार आमंत्रित वैज्ञानिकों व विषेषज्ञों द्वारा कृषि से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर तकनीकी सत्र होगा। इसमें प्रातः 11 से 11.30 बजे तक डॉ. नचीकेत कोतलीवाले पैकेजिंग व भंडारण पर जानकारी देंगे। इसके बाद किसान व एक्सपोर्टर आयुष बिनाई तथा विमल देषाई गेप व प्रमाणीकरण के बारे में बताएंगे। इसके अलावा किसान उत्पादक समिति के गठन, आवष्यकता व उनके कार्यों तथा बाजार में उपज की आवष्यकता पर डॉ. रविंद्र पस्तोर अपना उद्बोधन देंगे। इनके अलावा अन्य कृषि वैज्ञानिक भी तकनीकी जानकारियां किसानों के साथ साझा करेंगे। वहीं षाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत बाम्बे के अमित गुप्ता लाईव कंसल्ट रहेंगे।


Popular posts
आंसू" जता देते है, "दर्द" कैसा है?* *"बेरूखी" बता देती है, "हमदर्द" कैसा है?*
भगवान पार ब्रह्म परमेश्वर,"राम" को छोड़ कर या राम नाम को छोड़ कर किसी अन्य की शरण जाता हैं, वो मानो कि, जड़ को नहीं बल्कि उसकी शाखाओं को,पतो को सींचता हैं, । 
Image
शराब के बहुत नुकसान है साथियों सभी दूर रहे तो इसमें समाज और देश की भलाई है - अशोक साहू
Image
गुरुपूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं - शिवराम वर्मा - प्रबन्धक ट्रस्टी गायत्री शक्ति पीठ जोबट
Image
रायसेन में डॉ राधाकृष्णन हायर सेकंडरी स्कूल के पास मछली और चिकन के दुकान से होती है गंदगी नगर पालिका प्रशासन को सूचना देने के बाद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही