साल 2020: टीम इंडिया का पहला विदेशी दौरा इंडिया ने टी20 सिरीज़ 5-0 से जीता लेकिन वनडे सिरीज़ में 0-3 से हार मिली दो टेस्ट की सिरीज़ में पहला मैच 10 विकेट से हार कर इंडिया 1-0 से पीछे यानी भारतीय टीम लगातार चार मुक़ाबले हार चुकी है और अब टेस्ट सिरीज़ दांव पर है. ये है भारतीय क्रिकेट टीम के साल 2020 के पहले विदेशी दौरे का लेखाजोखा. आलम ये है कि बल्लेबाज़ों से रन नहीं बन रहे और गेंदबाज़ विकेट नहीं ले पा रहे. वहीं फिल्डिंग का स्तर भी वैसा नहीं दिखा जो बीते साल देखने को मिल रहा था. लेकिन कप्तान विराट कोहली कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार जीत तो क्रिकेट का हिस्सा है और हम दूसरा टेस्ट जीतने की कोशिश करेंगे. वो कहते हैं, "हम एक और हार के बारे में नहीं सोच रहे, अपनी बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फिल्डिंग की बदौलत हम जीतने में सक्षम हैं." सुनने में विराट कोहली की यह बात तो ठीक ही लगती है लेकिन इस दौरे पर मिली लगातार चौथी हार इसकी गवाही नहीं देती. आखिर क्यों? इसके पीछे वजह इन चार मैचों में मिली हार के अंतर अपने आप बयां कर रहे हैं. लगाचार चार मैचों में मिली हार पांच टी20 के जीत की रथ पर सवार टीम इंडिया ने पहले वनडे में 347 का स्कोर खड़ा किया लेकिन न्यूज़ीलैंड इसके बावजूद जीत गया. दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने 273 रन बनाए और टीम इंडिया बमुश्किल 250 का आंकड़ा छू सकी. चार बल्लेबाज़ दहाई का अंक भी नहीं छू सके. टीम की बल्लेबाज़ी कैसी रही? तीसरे वनडे में टी20 सिरीज़ के हीरो रहे केएल राहुल के शतक की बदौलत टीम ने 296 रनों का पहाड़ खड़ा किया लेकिन पहले वनडे में 347 रन का स्कोर आसानी से पार करने वाली न्यूज़ीलैंड को भारतीय गेंदबाज़ रोक नहीं सके. इसके बाद जब टेस्ट मैच खेलने के लिए टीम उतरी तो टीम इंडिया पहली पारी में महज़ 165 और दूसरी में 191 रन पर सिमट गई. हाल ये रहा कि टिम साउदी और ट्रेंट बोल्ट ने मिलकर 15 बल्लेबाज़ों को चलता किया और मैच का नतीज़ा 10 विकेट से जीत के साथ न्यूज़ीलैंड के पक्ष में चौथे दिन, लंच से पहले ही आ गया. इससे आसानी से समझा जा सकता है कि टीम की बल्लेबाज़ी कैसी रही. रही बात गेंदबाज़ी की तो, एक समय जिस न्यूज़ीलैंड के सात विकेट 225 रन पर गिर चुके थे उसके पुछल्ले बल्लेबाज़ों ने स्कोर को 348 रन पर पहुंचा दिया. यानी ईशांत को छोड़कर गेंदबाज़ी भी लचर ही रही. टीम इंडिया का दारोमदार कप्तान विराट कोहली समेत जिन खिलाड़ियों पर था उनमें चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी शामिल थे लेकिन संकट के समय ये सभी नाकाम रहे. यह बात सही है कि अनुभवी सलामी जोड़ी रोहित शर्मा और शिखर धवन को चोटिल होकर टीम से बाहर होना टीम को भारी पड़ा क्योंकि नई सलामी जोड़ी मयंक अग्रवाल और पृथ्वी शॉ अच्छी शुरुआत नहीं दे सकीत. लेकिन जब केवल टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले चेतेश्वर पुजारा और कोहली नहीं चले तो इन नए नवेले बल्लेबाज़ों को क्या दोष दिया जाए? कोहली ने 02 और 19 रन, पुजारा ने 11 और 11 रन तो रहाणे ने 46 और 29 रनों की पारी खेली. वहीं जसप्रीत बुमराह और शमी केवल एक-एक विकेट ले सके. पुजारा का हाल तो ये रहा कि दूसरी पारी में वह 81 गेंदों तक टिके रहे लेकिन रन बनाए केवल 11 और आउट होने का अंदाज भी कुछ ऐसा जिसे क्रिकेट की भाषा में कहा जाता है कि उन्हें पता नहीं चला उनका ऑफ़ स्टंप कहां है. विराट की पुजारा को नसीहत पुजारा के जैसे माहिर बल्लेबाज़ को जिस गेंद को खेलना चाहिए था उसे उन्होंने वेल लेफ़्ट कर दिया. वो न्यूज़ीलैंड के तेज़ गेंदबाज़ ट्रेंट बोल्ट की इन स्विंग पर यह ग़लती कर बैठे और गेंद उनका स्टंप उड़ा ले गई. हालांकि पुजारा तकनीक के धनी माने जाते हैं और उनके दम पर ही भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया को उसी की ज़मीन पर पहली बार टेस्ट सीरीज़ में हराया था. तब चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ में पुजारा ने तीन सेंचुरी जमाई थी. अब अगर दूसरे टेस्ट में भारत बड़े स्कोर की उम्मीद करता है तो पुजारा को बड़ी पारी खेलनी ही होगी. साथ ही उन्हें केवल पिच पर टिकना ही नहीं होगा बल्कि रन भी बनाने होंगे क्योंकि उनकी धीमी पारी से कप्तान कोहली भी खुश नहीं है. खुद कोहली ने कई बार कह चुके हैं कि इतना रक्षात्मक रुख को वो उचित नहीं मानते. दूसरी तरफ विराट कोहली भी न्यूज़ीलैंड की तेज़ और उछाल लेती विकेट पर परेशान नज़र आए. इस दौरे के पहले वनडे में अर्धशतक जमाने के बाद से विराट के बल्ले से अगली चार पारियों में 15, 09, 02 और 19 रन ही निकले हैं. उप-कप्तान रहाणे ने पहली पारी में ज़रूर 46 रन बनाए लेकिन दूसरी पारी में 131 गेंदों का सामना करने के बाद भी 29 रन ही बना सके. छह महीने पहले वेस्ट इंडीज की पिचों पर 93, 111 और 53 रनों की पारियां खेलने वाले हनुमा विहारी भी बेसिन रिज़र्व की पिच पर अपना जलवा नहीं दिखा सके और न ही ऋषभ पंत जिन्होंने बीते वर्ष ऑस्ट्रेलिया में 159 रनों की पारी खेली थी. गेंदबाज़ी में इशांत शर्मा ने पहली पारी में पांच विकेट ज़रूर झटके लेकिन 97 टेस्ट मैच का अनुभव भी उन्हें आज तक ऐसा गेंदबाज़ नहीं बना पाया है कि कठिन परिस्थितियों में वह लगातार विकेट निकाल सकें. रही सही कसर केवल एक एक विकेट लेकर जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी ने पूरी कर दी. हालांकि अश्विन ने तीन विकेट लिए लेकिन इसके लिए उन्होंने 99 रन भी दिए यूं बदल रही है भारतीय महिला फुटबॉल खिलाड़ियों की जिंदगी न्यूज़ीलैंड ने वनडे सिरीज़ में भारत को 3-0 से हराया
क्या न्यूज़ीलैंड से पार पा सकेगा भारत? जिस बुमराह की यॉर्कर गेंदों पर बीते वर्ष बल्लेबाज़ पवेलियन की राह पकड़ते रहे उन्होंने इस दौरे पर पांच टी-20, तीन एकदिवसीय और एक टेस्ट मैचों में अब तक केवल नौ विकेट ही हासिल किए हैं. न्यूज़ीलैंड में अब तक उनकी यॉर्कर का जादू दिखाई नहीं दिया है. यहां तक वह सही लाइन, लेंग्थ तक पर गेंद नहीं फेंक पा रहे. दूसरी तरफ न्यूज़ीलैंड के टिम साउदी और ट्रेंट बोल्ट के अलावा पहला टेस्ट खेल रहे कायल जैमीसन ने ऐसी सधी हुई गेंदबाज़ी की कि उसकी तारीफ़ खुद कप्तान विराट कोहली ने भी खुले दिल से की. विराट ने माना कि इनके अलावा ग्रैंडहोम ने भी एक ही जगह गेंद को पिच कराकर लगातार भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया. विराट ने स्वीकार किया कि कीवी गेंदबाजों ने फ्रंटफुट और बैकफुट पर खुलकर खेलने का मौक़ा ही नहीं दिया. बात अगर न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों की करें तो कप्तान केन विलियमसन और रॉस टेलर एक बार जमने के बाद मुश्किल खड़ी करने में माहिर हैं और पहले टेस्ट में उन्होंने किया भी ऐसा ही. टेलर अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में दिख रहे हैं. पिछली पांच पारियों में उनके बल्ले से 44, 12, नाबाद 73, नाबाद 109 और 53 रन निकले हैं जो बताते हैं कि भारतीय गेंदबाजों के लिए वो कितने बड़े सिरदर्द बने हुए हैं. न्यूजीलैंड ने भारत के खिलाफ़ पहला टेस्ट मैच जीतकर अपने टेस्ट इतिहास में 100वीं जीत हासिल की. अब कीवी टीम अपनी 101वीं शगुन जैसी जीत के मुहाने पर खड़ी दिखती है तो न्यूज़ीलैंड दौरे के अंतिम मैच में जीत के साथ भारत वापस लौटने के लिए टीम इंडिया एक बार फिर कप्तान विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की ओर नज़रें जमाई है.दोनों टीमों के बीच दूसरा और आखिरी टेस्ट मैच शनिवार से क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा.
दूसरे टेस्ट में क्या विराट की नसीहत पर पुजारा करेंगे अमल?
• Mr. Dinesh Sahu