जागो है ज्वाला माँ अग्नि का संचार करो । भस्म करदो कोरोना को विश्व का उद्धार करो ।। - शर्मिला

जागो है ज्वाला माँ
अग्नि का संचार करो ।
भस्म करदो कोरोना को
विश्व का उद्धार करो ।।


कोरोना का कहर ऐसा
विश्व थर-थर्रा उठा ।
गांव-गली और शहर शहर 
अब वीरान माँ होय उठा ।।


युद्ध सा माहौल हो गया
डरे डरे सब चहरे है ।
कोई कहि भी जा ना पाए
गली गली में पहरे है ।।


आ गये  माँ नवराते अब तो
कैसे हम मनाएंगे ।
फूल भी कही नही मिल रहे 
क्या श्रृंगार सजायेंगे ।।


बन्द हुवे बाजार ये सारे 
कहा से भोग मंगाए हम ।
नवराते में भी क्या तुझको
रूखा सूखा खिलाये हम ।।


कर्फ्यू लगा है सहर सहर
अब पंडित कहा से आएंगे
कैसे नवराते में तेरी
सहचंडी करवाएगे  ।।


अब तो माँ कुछ ऐसा करदो
चमत्कार माँ हो जाये
भारत की भूमि पे कोरोना 
आज ही दफन ही जाए ।।


नवराते से पहले ही माँ
काली रूप बनाओ ना ।
लाम्बी जीभ फैलाकर अपनी
कोरोना चट कर जाओ माँ ।।


रक्त बीज का रक्त पी गयी 
अब कोरोना की बारी है ।
दे दो इस दानव से मुक्ति 
ये ही अरज हमारी है ।।


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