जनता कर्फ्यू समाप्त ,बाहर जाना है ?? ठहरिए !!यह पढ़िए फिर विचार कीजिये ........ - विजय साहू

जनता कर्फ्यू समाप्त ,बाहर जाना है ??
ठहरिए !!यह पढ़िए फिर विचार कीजिये ........


  मगध नरेश जरासंध ने 16 बार मथुरा पर आक्रमण किया  और हर बार पराजित होकर वापस लौटा । सत्रहवीं  बार वह अपने साथ एक अजेय ,अमर योद्धा को लेकर मथुरा पर चढ़ाई करने चला  आया ।दोनों सेनाओं के मध्य भीषण युद्ध हुआ ,युद्ध के दौरान जब भगवान श्री कृष्ण को अनुभव हुआ कि इस अजय योद्धा कालयवन को शस्त्रों के द्वारा मारा नहीं जा सकता यह अवध्य है किसी वरदान के कारण तब अचानक भगवान श्री कृष्ण ने अपनी रणनीति बदली और प्रायोजित रूप से हल्ला मचाकर युद्ध का मैदान छोड़कर भागने लगे ।उन्हें देखकर सारे योद्धा भी भाग खड़े हुए।


         भगवान श्री कृष्ण कालयवन को चिढ़ाते हुए एक विशेष दिशा की ओर भागे ,कालयवन उनकी हत्या करने और युद्ध जीतने के लालच में  उनके पीछे पीछे अपना रथ लेकर दौड़ा । आगे आगे भगवान श्री कृष्ण और पीछे पीछे कालयवन । भागते भागते भगवान श्री कृष्ण एक विशिष्ट गुफा में घुस गए  , वहां जाकर उन्होंने अपना पीतांबर ( पीले रंग का उत्तरेय जो वे  धारण करते थे ) वहां पर सोते हुए एक व्यक्ति को ओढ़ाकर स्वयं छुप गए अंदर कही ।


         गुस्से से फनफनाता हुआ कालयवन जैसे ही वहां पहुंचा और  उसने  पीताम्बर ओढ़े उस व्यक्ति को देखा तो समझा की  ये ही श्री कृष्ण है तो उसने लात मार कर उस सोते हुए व्यक्ति को जगा दिया । वह व्यक्ति जब जागा  तो उसने अपने को जगाने वाले कालयवन को ध्यान से देखा तब उसकी आंखों से एक विशेष ज्योति निकली और उसने उस कालयवन का माथा फोड़ दिया ।


     इस प्रकार कालयवन मारा गया ।यह सब देख भगवान श्रीकृष्ण बाहर निकल आए राजा मुचकुंद काअभिवादन किया और उन्हें सब कुछ समझाया । राजा मुचकुंद को देवराज इंद्र द्वारा दीर्घनिद्रा  का आशीर्वाद मिला हुआ था।  वह कहानी किसी और दिन सुनाऊंगा उन्हें वरदान था कि जो भी उनकी निद्रा भंग करेगा उसका सर फट जाएगा ।


    कालयवन को मारकर श्रीकृष्ण पुनः युद्धक्षेत्र में लौटे और अपने शंख पांच्यजन्य से विशिष्ट ध्वनि का उदघोष करके सभी योद्धाओं को पुनः बुला लिया और फिर जरासंध को फिर से मारदिया । इस प्रकार मथुरा फिर से यह युद्ध जीती !


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      मित्रों हमारे शास्त्रों की ये कहानियां कई गूढ़ रहस्य छिपाए हुए है ।आज के परिपेक्ष्य में देखें तो पाएंगे कि कोरोनावायरस कालयवन के समान ही है फिलहाल उसे मारा नहीं जा सकता अवध्य है किन्तु वह आप के हृदय में स्थित श्रीकृष्ण  को मारने के लिए युद्ध के मैदान में सज्ज खड़ा है।
 ऐसे में उस से बचाव का केवल एकमात्र तरीका है और वह है राजा मुचुकन्द की तरह आइसोलेशन में अपनी गुफा में दीर्घनिद्रा में पड़े रहना , बस इसी तरह ही यह कलयुगी कालयवन को  मारा जा सकता है  ।


मित्रों ! कालयवन को हराना है और युद्ध जीतना है तो तत्काल पूर्ण रूप से अपनी गुफा अर्थात अपने घर मे सुरक्षित पड़े रहिए और कालयवन कोरोना को पराजित करने में सहयोग कीजिये । धैर्य से काम लीजिये और अपने पुरखों ,महापुरुषों के बताए इन गूढ़ रहस्यों को समझिए !!


 


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