कश्मीर की राजनीति बदलने में कोरोना वायरस का प्रकोप राजनेताओऔर केंद्र सरकार के लिए मददगार साबित होगा, जिसके पीछे वो आपस में किसी डील के फॉर्मूले पर काम कर सकते हैं. ?


अभी जब कोरोना वायरस के ख़तरे ने दुनिया पर अपना शिकाजा नही कसा था, तब भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मत्री अमित शाह कश्मीर में राजनीतिक व्यवस्था को दोबारा स्थापित करने के तमाम विकल्प तलाश रहे थे. कश्मीर में अगस्त महीने से लगभग लॉकडाउन की ही स्थिति थी. बीते साल 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर को मिले विशेषाधिकारों को निरस्त कर दिया था. अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के बाद इस क्षेत्र में हिसा की बेहद मामूली घटनाए हुई थी और किसी की जान नही गई. अब इस क़दम के कुछ महीनों बाद सरकार का सारा ध्यान जनता की नाराज़गी को सीमित रखने और अपने लिए नए राजनीतिक सहयोगियों को जमा करने पर केंद्रित हो गई थी. जनता की हिसक प्रतिक्रिया के डर से अधिकारियों ने हज़ारों राजनेताओ को बढ़ी बना लिया था. इनमें भारत समर्थक राजनेता भी शामिल थे. इनमें फ़ारूक़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती जसे प्रमुख नेता भी शामिल थे. पीडीपी में महबूबा मुफ़्ती के कई साथियों ने उनका साथ छोड़कर फ़ारूक़ और उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ़्ती की ग़M मौजूदगी से पण हुए ख़ाली सियासी मकान को भरने की कोशिश की थी. इन नेताओ में से अल्ताफ़ बुख़ारी एक वाल्पिक राजनतिक नेतृत्व देने वाले सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे.कई लोगों के कोरोना वायरस से सक्रमित पाए जाने के बाद फ़ारूक़ अब्दुल्ला को नज़रबढ़ी से रिहा कर दिया गया. रिहा होने के बाद फ़ारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जब तक बाक़ी के राजनीतिक बढ़ी रिहा नहीं हो जाते, तब तक वो राजनीति की कोई बात नही करेंगे. कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया में फाले डर और भारत में लॉकडाउन की तसारी के बीच फ़ारूक़ अब्दुल्ला के बेटे और कश्मीर के पूर्व मुख्यमन्त्री उमर अब्दुल्ला को भी 24 मार्च को नज़रबढ़ी से रिहा कर दिया गया. अयूब के अनुसार, "क्षेत्रीय स्वायत्तता से जुड़े हुए लोगों के जज़्बात पिछले आठ महीनों में काफ़ी कमज़ोर हो गए गए हैं. ऐसे में कोरोना वायरस के प्रकोप ने इस मुद्दे को और पीछे धकेल दिया हMऐसे में मोदी सरकार के लिए ये महामारी एक ऐसा सुनहरा मौक़ा लेकर आई हMजसमें वो राजनेताओ को रिहा कर रहे हैं." जहा तक कोरोना वायरस के प्रकोप की बात हMक तो इस हिमालयी क्षेत्र में, जिसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाढ़ दिया गया हलहा बहुत चुनौती भरी परिस्थितियापा हो गई हैं. अधिकारियों ने जम्मू और कश्मीर में कोरोना वायरस के सक्रमण के छह मामलों की तस्दीक़ की हMतो लद्दाख में अब तक 13 केस सामने आ चुके हैं. अकेले कश्मीर घाटी में ही साड़ों लोगों को लॉकडाउन का उल्लधन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया हMऔर कम से कम पाच हज़ार लोगों को आइसोलेशन और क्वारदाइन में रखकर उनकी निगरानी की जा रही है एक स्थानीय पत्रकार तारिक़ अली मीर कहते हैं, "हमें अभी ये नही मालूम कि कोरोना वायरस से भारत और कश्मीर पर किस हद तक प्रभाव पड़ेगा. जो राजनेता रिहा किए गए हैं उनका राजनीतिक सबाद मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करेगा. पहला तो ये कि कोरोना वायरस किस हद तक क्षेत्रीयता की उम्मीदों पर प्रभाव डालता हMऔर दूसरा ये कि ये रिहा हुए राजनेता अपने ताज़ा राजनीतिक समझौते के लिए कितना जनसमर्थन जुटा पाते हैं."


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