न्यूयॉर्क में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की शिखर सम्मेलन से पहले वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि धरती का तापमान घटने की बजाय और तेज़ी से बढ़ रहा है.


विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच साल अब तक रिकॉर्ड में दर्ज सबसे गर्म साल साल रहे, यानी 2014 से 2019 के बीच रिकॉर्ड गर्मी रही. इसी दौरान कार्बन डाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन में काफ़ी बढ़ोतरी होने के कारण समुद्री जलस्तर में भी वृद्धि हुई. डब्ल्यूएमओ ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए तत्काल तीव्र प्रयास किए जाने चाहिए. संस्था की रिपोर्ट में बढ़ती गर्मी के प्रभावों और कारणों पर हाल के वर्षों में नवीनतम जानकारियों का एक संकलन पेश किया गया है. इसमें बताया गया है कि 1850 से वैश्विक तापमान में 1.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है और 2011 और 2015 के बीच 0.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट इस तथ्य को रेखांकित करती है कि अभी धरती पर हर जगह कहानी एक जैसी है. मानवजनित कारणों से धरती का तापमान बढ़ रहा है जिससे गर्मी, लू और जंगलों में आग जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं. zथम इंस्टीच्यूट, इम्पीरियल कॉलेज लंदन के अध्यक्ष और रीडिंग विश्वविद्यालय में मौसम विभाग के प्रोफेसर ब्रायन होस्किन्स ने कहा, "हमारी वजह से जलवायु परिवर्तन बढ़ रहा है और ये खतरनाक होता जा रहा है."


केवल भाषण नहीं डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष शिखर सम्मेलन को जानकारी देना है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुताबिक बैठक में कई राजनेता शामिल होंगे, जिसे बयानबाजी नहीं बल्कि कार्रवाई के हिसाब से तैयार किया गया है. उन्होंने बैठक से पहले कहा, "मैंने नेताओं से लच्छेदार भाषण नहीं देने बल्कि ठोस प्रतिबद्धता के साथ आने को कहा है." उन्होंने कहा, "लोग समाधान, प्रतिबद्धता और कार्रवाई चाहते हैं. मैं उम्मीद करता हूँ कि एक घोषणा के अलावा अगले दशक के दौरान नाटकीय रूप से उत्सर्जन कम करने के लिए कई उद्देश्यपूर्ण योजनाओं और 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को खत्म करने के बारे में कोई घोषणा होगी." डब्ल्यूएमओ के पेटटेरी तालस ने बताया, "यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम ऊर्जा उत्पादन,उद्योग और परिवहन से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करें. अगर हम जलवायु परिवर्तन कम नहीं करते और पेरिस समझौते में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल नहीं करते तो यह खतरनाक होगा." उन्होंने कहा, "धरती का तापमान औद्योगिक क्रांति के वक़्त के स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक ना बढ़े, इसके लिए प्रयासों में तीन गुना तेजी लाने की आवश्यकता है. और ये वृद्धि 1.5 डिग्री से ज़्यादा ना हो, इसके लिए पांच गुना प्रयास करना होगा.


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