शास्त्र सरूपवाली उनका शरीर और उसके अवयव धर्मशास्त्र स्वरूप है .ब्रह्मांड पुराण

श्री गणेशाय नमः आज का नाम है शास्त्र मयी) शास्त्र सरूपवाली उनका शरीर और उसके अवयव धर्मशास्त्र स्वरूप है .ब्रह्मांड पुराण के अनुसार उन्होंने अपनी सांस से यजू और सांम और अथर्व वेद की रचना की अपने अभिमान से महामंत्र का और अपनी मधुर वाणी से कविता नाट्य अलंकार शास्त्र छंद ,और काव्या आदि शास्त्र का सृजन किया .अपनी जिह्वा से सरस्वती को मूर्तिमान कर दिया अपनी चकोर आक्षी अपने मुख से वेदों के 6 अंगों मीमांसा न्याय शास्त्र पुराण धर्मशास्त्र आदि की रचना की .कंठ की ऊपरी रेखा से धनुर्वेद और आयुर्वेद की रचना की .कंठ की मध्य रेखा से 64 विद्याओं की तथा शरीर के समस्त अवयवों से अन्य समस्त तंत्रों की और कंधों से काम कला विज्ञान की रचना की जय माई की


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