15 साल म.प्र. के किसानो को झूठ बोला, फिर शिवराज की झूठ की दुकान चालू हो गयी: सज्जन सिंह वर्मा


15 साल म.प्र. के किसानो को झूठ बोला, फिर शिवराज
की झूठ की दुकान चालू हो गयी: सज्जन सिंह वर्मा


भोपाल, 


मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने किसानों की फसल खरीदी तथा फसल बीमा योजना के प्रीमियम को लेकर शिवराज सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि झूठ बोल रही है शिवराज सरकार, अपने पिछले कार्यकाल में 3 साल तक नहीं चुकाया फसल बीमा योजना का प्रीमियम जिसे कमलनाथ सरकार का बताया जबकि कांग्रेस सरकार ने पिछले साल ही दे दिया अपने हिस्से का पैसा।
श्री वर्मा ने सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया तथा कहा कि यह शिवराज की झूठ फैलाने की जादूगरी ही है कि फसल बीमा योजना का अपनी सरकार के समय का 23 सौ करोड़ रूपया बाकी था जिसे कमलनाथ सरकार का बताकर किसानों को गुमराह किया। फसल बीमा योजना का प्रदेश के हिस्से का 40 प्रतिषत प्रीमियम 2015-16, 2016-17 और 2017-18 का बाकी था जिस समय शिवराज की ही सरकार थी। कांग्रेस के सरकार बनने पर हमने पिछले वर्ष का प्रदेश के हिस्से का 505 करोड़ रुपया  केंद्र सरकार को दे दिया था और बारिश के बाद किसान इंतजार कर रहे थे कि उन्हें फसल बीमा का भुगतान होगा लेकिन केंद्र ने पुराना बाकी होने का हवाला देकर प्रदेश के किसानों को राशि नहीं दी।
फसल खरीदी के आंकड़ों में भी शिवराज की झूठ की जादूगरी दिखाई देने लगी है सरकार अब तक पिछले वर्ष के मुकाबले 40 प्रतिषत अधिक उपार्जन दिखा रही है वही हकीकत कुछ और है। आज की तारीख में यदि हम देवास मंडी (अनाज की बड़ी मंडी) की बात करें तो अभी तक सिर्फ 18500 क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई है जो कि इस समय तक 4.5 लाख क्विंटल खरीदी होती है।  कौन सा गणित सरकार लगाती है जनता को आंकड़े दिखाने में इससे साफ साबित होता है सरकार के ‘‘झूठ का गणित।’’ इन्ही झूठे आश्वासन से पिछले 15 सालों में किसान आत्महत्या दर सर्वोच्च थी, उसी राह पर फिर म.प्र. चल रहा।
फसल खरीदी के लिए एक सोसाइटी में एक दिन में मात्र 20 किसानों को ही एसएमएस भेजे जा रहे हैं। शिवराज ने कहा था कि किसानों का हर तरह का गेहूं हम खरीदेंगे चाहे वह सफेद पड़ गया हो। एक-एक दाना खरीदूंगा लेकिन प्रदेश में किसानों को वापस लौटाया जा रहा है। प्रदेश के किसानों का मानना है कि शिवराज के कदम ऐसे अशुभ है कि उनके सरकार बनाते ही किसान की खड़ी फसल एवं खेत में कटकर पढ़ी हुई फसल का सर्वनाश हो गया। गेहूं सफेद पड़ गया। किसान के लिए शिवराज के कदम पनौती है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ छोटे किसानों को ही एसएमएस किए जा रहे हैं जिनसे मात्र 8-8 क्विंटल गेहूं खरीदे जा रहे हैं, 200-300 क्विंटल गेहूं पैदा करने वाले किसानों को इसलिए एसएमएस नहीं भेज रहे हैं, ताकि ज्यादा गेहूं नहीं खरीदना पड़े। कंगाल सरकार के पास किसान का गेहूं खरीदने के लिए पैसे नहीं है।
सरकार ने सीधे व्यापारियों को गेहूं खरीदने की इजाजत दे दी है ताकि व्यापारियों के फायदे के लिए कम कीमत में व्यापारी किसान से सीधे गेहूं खरीद पाए। यह नीति किसानों के लिए अत्यंत ही खतरनाक है। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर व्यापारी उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं देगा और पैसों की जरूरत के चलते किसान सस्ते में अपनी फसल बेच देगा। सरकारी खरीदी की सुस्त चाल, अव्यवस्थाओं के चलते तथा फसल की क्वालिटी को लेकर कई किसानों को वापस लौटाए जाने के कारण किसानों में डर है, जिससे वह अपनी फसल व्यापारियों को सस्ते में बेचकर नुकसान उठाएंगे।
साथ ही किसानों से फसल खरीदी की पूरी प्रक्रिया लापरवाही की भेंट चढ़ रही है, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किसान 2-3 किलोमीटर की लाइनें लगा कर धूप में परेशान हो रहे हैं। इससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा और किसानों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
श्री वर्मा ने सरकार से मांग की कि किसानों की फसल खरीदी के लिए व्यापक   दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा सभी तरह की फसल किसानों से खरीदी जाए। पूरी व्यवस्था की निगरानी उच्च स्तरीय समिति बनाकर की जाए और किसानों के हित में फैसले लिए जाएं।