एक आंधी चली थी रेलवे का निजीकरण कर देने की..... रेलवे ही क्यों... ऑर्डिनेन्स/विद्युत/शिक्षा/NTPC सभी को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी थी। 

*रेलवे*


एक आंधी चली थी रेलवे का निजीकरण कर देने की.....
रेलवे ही क्यों... ऑर्डिनेन्स/विद्युत/शिक्षा/NTPC सभी को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी थी। 


एक रोज एक हैवान आया। हां सही पहचाना, *कोरोना....*
भारत सरकार सहित जनता को भी याद आये *सरकारी कर्मचारी*।


👉वही कर्मचारी जो अब तक निठल्ले कहे जाते थे।
👉वही कर्मचारी जो कामचोर कहे जाते थे।
👉वही कर्मचारी जिनसे देश की अर्थव्यवस्था ख़तरे में जा रही थी।
👉वही कर्मचारी जिन पर सरकार जब मोटा बज़ट खर्च करती थी तो लोगों के पेट में दर्द होता था कि यह तो व्यर्थ खर्च किया जा रहा है।


🙏आज वो सब कहां है.... 
🙏आज वो न्यूज़ चैनल कहां है जब रेलवे बेचने की तैयारी थी तब वे उसके लाभ गिना रहे थे.?
🙏 आज वो ऐंकर कहाँ हैं जो रेलवे के आंदोलन को दिखाने में परहेज़ कर रहे थे.?
🙏आज वो मीडिया हाउस कहाँ है जो आंदोलन को महज कुछ सिरफिरे आंदोलनकारियों की ज़िद कहा करते थे.?


सवाल तो उठेंगे.....❓
और यह सवाल सभी सरकारी कर्मचारियों के हैं।


इस मुश्किल वक़्त में अपने परिवार को छोड़कर दिन रात देश की सेवा में समर्पित सरकारी कर्मचारियों को हम दक्षिणा स्वरूप क्या देंगे.?


जब हालात बेहतर होंगे क्या फिर वही निजीकरण का शिगूफा पकड़ाएंगे।
मुझे उम्मीद है आपकी आंख तो जरूर खुली होगी। 


आप सोच रहें होंगे कि आज अचानक रेलवे का जिक्र क्यों.?
तो आइए आपको यह भी बतला देते है। 


पंजाब के कपूरथला जनपद में *रेल कोच फैक्ट्री* स्थापित है।
जिसका कार्य रेलवे के यात्री डिब्बा तैयार करना है।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जाने के लिए जिस रेल के डिब्बे में आप बैठते हैं वह उसी रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और ही बनाए जाते हैं वर्तमान समय में यह फैक्ट्री स्वास्थ्य कर्मियों के लिए *PPE ड्रेसेस* का निर्माण कर रही है। 


इसी रेल कोच फैक्ट्री ने *दुनिया का सबसे सस्ता वेंटिलेटर* बनाया जहाँ अन्तर्राष्ट्रीय मार्केट मे वेंटिलेटर की कीमत *2.5 लाख से 40 लाख* तक है वहीं रेल कोच फैक्टरी कपूरथला ने मात्र *18 हजार* की लागत में वेंटिलेटर तैयार कर दिया।


इन कर्मचारियों की जिजीविषा यही तक नहीं रुकी है।


👉रेल कोच फैक्ट्री रायबरेली सेनेटाइजर व मास्क का निर्माण कार्य कर रही है..
👉डीजल लोको मॉडर्नाइजेशन वर्क्स पटियाला भी सेनेटाइजर और मास्क के निर्माण में लगी है..
👉उत्तर रेलवे के जगाधरी वर्कशॉप जगाधरी डॉक्टरों के पहनने के लिए PPE बनाया जिसे DRDO ने उत्पादन के लिए पास भी कर दिया..
👉वहीं NCR जोन के गोरखपुर में एक रेलवे इंजीनियर ने मात्र 20 रुपए में फेस शील्ड बनाकर तैयार किया यही नहीं रुके रेलवे के कर्मचारी जगाधरी वर्कशॉप के ही कर्मचारियों ने सेनेटाइजर टनल बनाया..
👉जोधपुर के वर्क शॉप ने सस्ता टिकाऊ स्ट्रेचर बनाकर इस आपात काल में अपनी महती भूमिका निभा रहें है..


जब जब देश पर विपदा आयी है रेलवे ने अपने हाथों को फैला दिया है देश की रक्षा हेतु।
यह हम सभी का कर्तव्य भी है। 
यह भी एक तरह से युद्ध ही है, जिसमें यह नहीं पता कि *कोरोना रूपी गोली किस ओर से प्रहार कर देगी*। 


सरकार से अनुरोध है कि कर्मचारियों के त्याग और बलिदान को ध्यान में रख कर आगामी निर्णयों को लेते समय यह न भूलें कि विपदा में *भीष्म पितामह* की तरह कोई अंत तक मृत्यु से लड़ता रहा वह सरकारी कर्मचारी ही था।
*पुरानी पेंशन बहाली भूलिएगा नहीं....*


"सुन, इस धरा के लिए मैं,
    बता और क्या-क्या करूँ मैं ।
      बस यही आरज़ू शेष है मुझमें
       सौ-सौ बार मरूं मैं
           सौ-सौ बार जियूँ मैं !"