कोरोना वायरस: अगले कुछ सप्ताह भारत के लिए अहम


बीते रविवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिहाज़ से अगले तीन से चार सप्ताह बेहद अहम हैं. भारत में कोरोना वायरस का पहला कंफर्म मामला 30 जनवरी को सामने आया था. इसके बाद इस महामारी को रोकने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं. भारत ने कोरोना वायरस संक्रमण को टेस्ट करने की अपनी क्षमता को बढ़ाया और महामारी रोकने के लिए लोगों की भीड़ भाड़ को रोकने के लिए 122 साल पुराना सख्त कानून भी लागू कर दिया. इसके अलावा अब तीन सप्ताह तक चलने वाले लोकन को 15 अप्रैल के बाद इस महीने के अंत तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. भारत में एक अरब से ज्यादा लोग अपने घरों में कैद हैं. सड़क, रेल और हवाई मार्ग से यातायात सेवाएं निलंबित हैं. कई लोग यह भी बता रहे हैं कि अस्पतालों में कोवि@19 संक्रमण और इंफ्लूएंजा जैसे बुखार को लेकर पहुंचने वाले लोगों की संख्या में तेज़ी आने की रिपोर्ट नहीं है, ऐसा होने पर यह कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का संकेत होता.


लेकिन यह भी संभव है कि जानकारी की कमी और कमज़ोर रिपोर्टिंग के चलते ऐसा हो रहा हो. इंदौर के एक निजी अस्पताल में मैं ने मरीजों की संख्या में उछाल देखा था. इस अस्पताल में कोवि@19 के 140 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा था और इसमें करीब एक तिहाई मामलों में स्थिति गंभीर थी. रविवार तक अस्पताल में एक दिन में 40 नए मामले पहुंच रहे थे. अस्पताल के चेस्ट स्पेशलिस्ट के रवि दोशी ने बताया, "हमें लगा था कि संक्रमण के मामले कम हुए है लेकिन अचानक से पिछले दो दिनों में मरीजों की संख्या काफ़ी बढ़ गई है." आर्थिक सुस्ती पर रोक के लिए लॉकन में ढील देने और कोरोना संक्रमण के ग्राफ को सपाट बनाने के लिए अब कहीं ज्यादा निगरानी की ज़रूरत होगी कि कौन संक्रमित है और कौन संक्रमित नहीं है.


इसके लिए भारत को लाखों टेस्टिंग किट और प्रशिक्षित तकनीशियनों की जरूरत होगी. कोवि@9 संक्रमण का टेस्ट भी काफ़ी जटिल प्रक्रिया है. इसमें यह सुनिश्चित करना होता है कि दसियों हज़ार सैंपल लैब में ठीक से पहुंचाए जाएं. भारत के पास सीमित संसाधन हैं जिसकी क्षमता भी लिमिटे@है. ऐसे में @ रवि कहती हैं कि 'पूल टेस्टिंग' का रास्ता ही बचा हुआ है. ज्यादातर वायरोलॉजिस्टों का कहना है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों को टेस्ट करने की ज़रूरत है. एक वायरलोजिस्ट ने बताया कि श्वसन संबंधी इंफेक्शन वाले हर मरीज़ का टेस्ट किया जाना चाहिए. भारत में संक्रामक रोगों के टेस्ट कराने की संस्कृति नहीं है क्योंकि ज्यादातर नागरिक इसका खर्च नहीं उठा सकते. जोखिम को कम करना हमारी संस्कृति में नहीं है. एक वायरोलाजिस्ट ने बताया, "यह लंबे समय तक चलेगा. संक्रमण रोकने के लिहाज़ से हम भारत को एक एपिसो@के तौर पर नहीं देख सकते. इस वायरस का असर इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा. यह भी समझना होगा कि भारत के सभी राज्यों में संक्रमण के कम या ज्यादा मामले एक साथ देखने को नहीं मिलेंगे." ऐसे में आने वाले सप्ताहों में ही पता चलेगा कि भारत में संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ेगे या भारत ने संक्रमण को फैलने से रोकने में कामयाबी हासिल कर ली है.


के जॉन बताते हैं, "यह ऐसी पहेली है जिसमें हज़ारों सवाल है. इनके जवाब देना आसान नहीं है."