कोरोना वायरस: मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में कोरोना मरीजों की संख्या 1000 हजार को पार चुकी है.


इंदौर में 25 मार्च की स्थिति में केवल 4 कोरोना मरीज़ थे वही 23 मार्च की स्थिति में यही आंकड़ा 1029 पर पहुंच गया. इंदौर में मौतों की तादाद को भी देखा जाये तो वहां अब तक 55 लोगों की मौत हो चुकी है. इंदौर जिस तरह से कोरोना का हॉटस्पॉट बना है उससे न सिर्फ प्रदेश सरकार बल्कि केंद्र सरकार भी हैरान है. केंद्र सरकार ने इंदौर के लिये एक केंद्रीय दल भी भेजा ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सकें. इंदौर की स्थिति को जानने के लिये हमने इस मामले में नज़र रखने वालों से बातचीत की ताकि इस नतीजे पर पहुंचा जाए कि आखिर चूक किस स्तर पर हुई? .


कम्युनिटी ट्रांसमिशन? जब उनसे पूछा गया कि क्या यह माना जा सकता है कि इंदौर जैसे शहर में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरु हो गया है तो उन्होंने कहा कि इसको अभी तक डॉक्यूमेंट नहीं किया गया है. वहीं मेडिकल एथिक्स पर काम करने वाले डाक्टर अनंत भान का मानना है कि इंदौर की स्थिति को ज्यादा से ज्यादा लॉकडाउन का पालन कराने और टेस्ट कराकर पॉजिटिव मरीजों को चिह्नित करने से ही काबू में किया जा सकता है. डॉ. अनंत भान ने बताया, "ज़रुरत इस बात की है कि टेस्ट की तादाद लगातार बढ़ायी जाए और कोरोना पॉजिटिव लोगों को पहचाना जा सके."



मध्यप्रदेश से दिल्ली और पड्डुचेरी सैंपल जहाज़ से भेजे जा रहे है. इस क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इससे स्थिति पर काबू पाना आसान नहीं होगा. जहां इसमें पैसा भी ज्यादा लगेगा वही देरी भी होगी. वहीं, जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक अमूल्य निधि का कहना है कि सरकार ने शुरुआती दौर में थोड़ी बहुत व्यवस्थित योजना बनाई थी लेकिन वह प्लान बदल के नया प्लान लाया गया जिसकी वजह से स्थिति काफी बदली है.


आंकड़ों में अंतर उन्होंने कहा, "सरकार ने 5 अप्रैल 2020 से विदेश से आये लोगों (जिन्हें क्वारंटीन या आइसोलेशन में रखा गया था) की जानकारी देना बंद कर दिया है. साथ ही जो राज्य का बुलेटिन है उसमें से बहुत सारी जानकारी सारे अनियमित और अधूरी है." अमूल्य निधि ने बताया, "स्वास्थ्य बुलेटिन में 18-19 अप्रैल को कई सारे जिलों के पॉजिटिव केसों के आकड़ें कम हो गये जो की भ्रम पैदा करने के साथ ही आकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल पैदा करते है. यह आंकड़े देश और वैश्विक स्तर पर साथ ही साथ विश्व स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन और अनुसंधान के लिए जरूरी हैं. सरकार को समीक्षा करनी चाहिए कि आखिर बुलेटिन में ऐसा क्यों और किसने किया? जानकारी गलत देना या छुपाना भी जन विरोधी हैं."


भरोसा बढ़ाए जाने की ज़रूरत हालांकि सामाजिक कार्यक्रता मानते है कि ज़रुरत इस बात की है कि सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए जिससे उनमें विश्वास बढ़ाया जाए वहीं सामाजिक कार्यक्रता इस बात पर आवाज़ उठा रहे है कि इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में ज्यादातर मरीज प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल है. उन्होंने सवाल उठाये हैं कि मरीज सरकारी अस्पताल में कम क्यों है जब कि सरकारी स्वास्थ्य विभाग का अमला 16-18 घंटे कम कर रहे है. ये निर्णय कैसे लिया जा रहा है कि कौन मरीज किस अस्पताल में जायेगा, नियोजन कैसे हो रहे है. वहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मानना है कि इंदौर शहर में कोरोना पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा. उन्होंने कहा, "3 मई तक स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण होगा. सरकार पूरी तरह से लग गई है. इंदौर में जरुर कुछ मामले बढ़े है लेकिन वह जल्द ही काबू में होगें."


 


 


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