कोरोना वायरस महामारी: स्वीडन ने बिल्कुल अलग रास्ता क्यों चुना स्वीडन में महामारी कितनी गंभीर है?


कोरोना वायरस की महामारी रोकने के लिए एक तरफ़ तो दुनिया भर के देश अपने यहां कड़ाई से लॉकडाउन लागू कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ स्वीडन के बड़े हिस्से में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है. स्वीडन में रोज़मर्रा की जिंदगी और आर्थिक गतिविधियां चालू रखने के फैसले को जनता का व्यापक समर्थन मिला है.


स्वीडन की रणनीति स्वीडन में कोविड-19 की महामारी की वजह से बहुत कम चीज़ों पर फ़र्क पड़ा है या फिर उन्हें बंद किया गया लेकिन इसके बावजूद आँकड़ें बताते हैं कि आबादी का एक बड़ा तबका अपनी मर्जी से सोशल डिस्टेंसिंग अपना रहा है. कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वीडन की रणनीति की यही सबसे मूल बात है. सार्वजनिक यातायात का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या काफी कम हो गई है. बड़ी तादाद में लोग अपने घरों से काम कर रहे हैं.


स्वीडन में महामारी कितनी गंभीर है? स्वीडन की सरकारी हेल्थ एजेंसी का कहना है कि कोविड-19 की महामारी को रोकने के लिए स्वीडन की रणनीति पर लोगों ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी है, उसकी तारीफ़ की जानी चाहिए. हालांकि इस तारीफ़ में भी एहतियात बरतने की गुंजाइश है. स्वीडिश वैज्ञानिकों के नज़रिये पर पर हफ़्तों तक ये बहस चली है कि क्या स्वीडन की योजना संवेदनशील और लंबे समय तक कायम रहने वाली है? या स्वीडन ने अनजाने में अपने लोगों के साथ ऐसा प्रयोग कर दिया जिसमें गैरजरूरी जाने जा रही हैं? या कोविड-19 की महामारी पर काबू पाने में वो नाकाम हो जाएगा?


मीडिया के सामने राजनेता नहीं डॉक्टर स्वीडन के स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले महामारी विशेषज्ञ एंडर्स टेग्नेल कहते हैं, "हमने जो हासिल करने का लक्ष्य रखा था, हम काफी हद तक वो पाने में कामयाब रहे हैं. स्वीडन की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार काम कर रही है. हम पर बहुत दबाव भी है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि किसी मरीज़ को लौटाया जा रहा हो."


स्वीडन ने अलग रास्ता क्यों चुना? डॉक्टर एंडर्स टेग्नेल और उनकी टीम का ये मानना था कि आबादी का एक हिस्से पर कोरोना वायरस का सीमित प्रभाव पड़ेगा. जबकि लंदन के इंपीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों समेत दूसरे विशेषज्ञों ने इसके उलट अपनी राय दी थी. इसके बाद स्वीडन ने समाज के बड़े हिस्से को खुला रखने का फैसला किया. दूसरी तरफ़ यूरोप के ज़्यादातर इलाकों में लॉकडाउन लागू किया जा रहा था. लंदन के इंपीरियल कॉलेज की रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन ने अपने यहां लॉकडाउन लागू करने का फैसला किया.


आंकड़ें क्या कहते हैं? कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या के लिहाज से देखें तो एक करोड़ की आबादी वाले स्वीडन की गिनती दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रभावित 20 देशों में होती है. ये आंकड़ें तब हैं जब स्वीडन में ज्यादातर उन्हीं लोगों का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिनमें संक्रमण के गंभीर लक्षण थे. स्वीडन के आंकड़ों में वृद्धाश्रमों में मरने वाले लोग भी शामिल हैं. कुल मौतों का 50 फीसदी आंकड़ा इन्हीं वृद्धाश्रमों का है. डॉक्टर एंडर्स टेग्नेल इसे चिंता की बड़ी वजह मानते हैं. डॉक्टर क्लॉडिया उन 22 वैज्ञानिकों में हैं जिन्होंने पिछले हफ्ते ही स्वीडन के प्रमुख अखबार में सरकारी नीति पर आलोचनात्मक लेख लिखा है. उन लोगों का कहना है कि बिना प्रतिभा वाले अधिकारियों को निर्णय लेने की जिम्मेदारी दे दी गई है.


 


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