सुनो कन्हैया.... - मधुशुधन शर्मा


*सुनो कन्हैया....
बिखर न जाएँ हम कहीं 
थाम लो प्यारे
एक पल भी न रह सकते हैं
बिन तुम्हारे


हरेक साँस बस 
तेरा ही नाम लेती है
हरेक साँस बस 
मोहन तुझे ही पुकारे
बिखर न जाएँ......


ये भी सच है हमें 
इश्क़ का इल्म न हुआ कभी
इश्क़ की बाज़ी में तुम 
जीते मोहन हम हारे
बिखर न जाएँ .......


जाने क्यों दर्द भी अब 
अज़ीज़ लगने लगे
ले लो मेरी खुशियाँ 
अपने गम दे दो सारे
बिखर न जाएँ ......


तुमको है इश्क़ ये 
इस दिल को ऐतबार है
बस इसी आस में 
कट जाएँगे दिन मेरे सारे
बिखर न जाएँ ........


क्यों ये दिल बार बार 
तेरे लिए रोता है
क्यों तुम हो गए हो 
मुझे जान से भी ज्यादा प्यारे
बिखर न जाएँ हम कहीं 
थाम लो प्यारे
एक पल भी न रह सकते हैं
बिन तुम्हारे


*जय श्री राधेकृष्ण*