ग्रीन जोन में बने रहना असंभव नहीं है थोड़ी सी लापरवाही हमें ऑरेंज या रेड जोन में ला सकती है - कमिश्नर डॉ. भार्गव


उमरिया . रीवा एवं शहडोल संभाग के कमिश्नर डॉ. अशोक कमार भार्गव ने बताया कि रीवा संभाग के चारों जिले ग्रीन जोन में हैं। यह विन्ध्य क्षेत्र के लिए सुखद समाचार है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोरोना वायरस से लड़ाई समाप्त हो गई है। जब तक यह वायरस पूर्णतरू समाप्त नहीं हो जाता तब तक कोरोना के विरुद्ध हमारी जंग निरंतर जारी रहेगी। हम जानते हैं कि कोरोना वायरस वायरस को समाप्त करने की कोई दवा अभी उपलब्ध हैए ऐसी स्थिति में हमारी सावधानीए सतर्कताए लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन हमें कोरोना वायरस से मुक्ति दिला सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालयए स्वास्थ्य विभाग तथा जिला सरकार के गृह मंत्रालयए स्वास्थ्य विभाग तथा जिला संकट प्रबंधन समूहों द्वारा लिये गये निर्णयोंए निर्देशों का धैर्यए अनुशासन और संकल्प के साथ पालन किया जाये।


कमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि अन्य राज्यों में फंसे हुए संभाग के मजदूरोंए नागरिकों आदि को वापस लाने के लिए शासन के निर्देशानुसार प्रयास किये जा रहे हैं। वापस लाये जाने पर इन सबका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और लॉकडाउन के निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही की जा रही हैसंभाग के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि बाहर से आये हुए लोगों की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी जाये। ऐसे व्यक्ति जिनको क्वारेंटाइन किया गया हो और वे क्वारेंटाइन नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उसकी भी सूचना दी जाये। किरानाए दूधए सब्जीए फल की दुकानों पर दो गज की दूरी का पालन न करने वालों एवं बिना मास्क के घूमने वालों की सूचना भी कंट्रोल रूम में दी जाये। कमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि अब तक सभी नागरिकों ने लॉकडाउन का पालन किया है। भविष्य में भी नियमों का पालन करेंगे तो रीवा संभाग ग्रीन जोन में बना रहेगा और शहडोल संभाग के अनूपपुर और शहडोल जिले भी ग्रीन जोन में आ जायेंगे। अभी तक दोनों संभागों में कोरोना की जांच के लिए 1124 सेंपल भेजे गए हैं। जिनमें रीवा और अनूपपुर से दो-दो जबकि शहडोल में तीन पॉजिटिव केस पाये गये हैं। अनूपपुर और शहडोल में जो पॉजिटिव केस पाये गये हैं वह बाहर से आने वाले मजदूरों के हैंइन व्यक्तियों के सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों से संबंधित सभी टेस्ट भी निगेटिव आये हैं। इसलिए कोरोना से भयभीत होने एवं डरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि संयम के साथ उसका सामना करने तथा निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है। इस तरह हम दोनों संभागों के जिलों को ग्रीन जोन में रखने में कामयाब होंगे।


कमिश्नर डॉ. भार्गव ने बताया कि रीवा संभाग में अब तक 91 हजार 75 व्यक्तियों की मेडिकल जांच की गई है जिसमें से 706 सेम्पल जांच के लिए भेजे गये हैं। संभाग में 34 हजार 548 लोगों को होम क्वारेंटाइन तथा दो हजार 380 लोगों को संस्था क्वारेंटाइन किया गया है। वहीं शहडोल संभाग में अब तक 74 हजार 19 लोगों की मेडिकल जांच की गई है जिसमें से 418 सेम्पल जांच के लिए भेजे गये हैं। संभाग में 53 हजार चार सौ लोगों को होम क्वारेंटाइन तथा एक हजार 463 लोगों को संस्था क्वारेंटाइन किया गया हैकमिश्नर डॉ. भार्गव ने बताया कि रीवा संभाग की आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 74 लाख 98 हजार है। लॉकडाउन प्रारंभ होने के बाद से उसके बाद अभी तक केवल दो ही पॉजिटिव केस सामने आये हैं जो अस्पताल में क्वारेंटाइन हैं और पूर्णतरू स्वस्थ हैं। शीघ्र ही उनकी छुट्टी कर दी जायेगी। इनके सम्पर्क में आये व्यक्तियों के सेंपल टेस्ट कराये गये हैं जो सभी निगेटिव पाये गये हैं। ठीक इसी तरह वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहडोल संभाग की आबादी 24 लाख 60 हजार 58 है।


शहडोल संभाग में लॉकडाउन प्रारंभ होने के बाद से शहडोल में तीन और अनूपपुर में दो पॉजिटिव केस पाये गये हैं। कमिश्नर डॉ. भार्गव ने बताया कि यह अच्छा संकेत है कि दोनों संभागों की लगभग एक करोड़ से अधिक आबादी है जिसमें पॉजिटिव केसों की संख्या अत्यंत ही कम है और वह भी नियंत्रण में है। इसलिए किसी भी प्रकार की दहशत दहशत या भय को निर्मित करने की आवश्यकता नहीं है। कमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि हम दूरदर्शनए सोशल मीडियाए आकाशवाणी और पिट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मीडिया के माध्यम से निरंतर कोरोना वायरस की जानकारियों को देखए सुन और समझ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार अनवरत कोरोना संबंधी जानकारियों के कारण 20 से 30 प्रतिशत ऐसे रोगियों की संख्या बढ़ी है जिन्हें दैहिक विकार (सोमेटिक डिसऑर्डर) कहते हैं। मौसम में बदलाव के कारण लोग सामान्य सर्दीए खांसीए जुकाम या बुखार को कोरोना वायरस के लक्षण मानकर भयभीत होने लगते हैं जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता है। यदि हम लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं और संक्रमित व्यक्तियों से दो गज दूरी का पालन करते हुए सम्पर्क में नहीं आ रहे हैं तब आपको कोरोना वायरस होने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता। अतरू ऐसी स्थिति में इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं हैऐसे लक्षण पाये जाने पर तरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें और बिना किसी भय के अपना कार्य जारी रखेंकमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि हम हम समन्वित प्रयासों और धैर्य तथा अनुशासन का पालन करते हुए कोरोना वारियर्स के सहयोग से दोनों संभागों में कोरोना वायरस को पूर्णतरू समाप्त करने में कामयाब होंगे। .. 


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