कोरोना वायरस: कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने के लिए दुनियाभर में कोशिशें चल रही हैं. अब इसराइल ने दावा किया है कि उसने कोरोना वायरस को ख़त्म करने वाला एंटीबॉडी विकसित कर लिया है.


कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने के लिए दुनियाभर में कोशिशें चल रही हैं. अब इसराइल ने दावा किया है कि उसने कोरोना वायरस को खत्म करने वाला एंटीबॉडी विकसित कर लिया है. इसराइल के रक्षा मंत्री नफ्ताली बेनेट ने दावा किया है कि देश के प्रमुख बायोलॉजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के लिए एक एंटीबॉडी विकसित करने में "महत्वपूर्ण सफलता" हासिल की है. इस बारे में जारी बयान में कहा गया है कि ये एंटीबॉडी, वायरस पर अटैक करता है और उसे शरीर में बेअसर कर देता है. रक्षा मंत्री के मुताबिक, एंटीबॉडी को विकसित करने का काम पूरा हो चुका था और संस्थान "इसे पेटेंट कराने की प्रक्रिया में है". जिसके बाद इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन का काम किया जाएगा. दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में मेडिसिन डिपार्टमेंट के वाइस चेयरमैन डॉ अतुल कक्कड़ भी कहते हैं कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कोई नई चीज़ नहीं है. पहले भी इसका इस्तेमाल कैंसर, गठिया और कई तरह के इंफेक्शन में होता रहा है. वे कहते हैं, "मोनोक्लोनल एंटीबॉडी रेडिमेट होती है. इसके नाम में है मोनो यानी एक. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी एक टारगेट पर काम करती है." कैसे काम करती है



डॉ अतुल के मुताबिक़, हमारा शरीर इंफेक्शन से बचने के लिए कई स्तर पर काम करता है. शरीर खुद इम्युनोग्लोबुलिन एंटीबॉडी बनाता है, जो प्लाज़्मा सेल से बनते हैं. लिवर के बिल्कुल पास तिल्ली नाम का एक अंग होता है, जानवर के इस अंग में एंटीबॉडी बनता है. एंटीबॉडी और तिल्ली के सेल को फ्यूज़ करके एक हाइब्रडोमा बनाता है. इससे ही वो एंटीबॉडी बनता है, जिसकी ज़रूरत होती है. जिसे निकालकर इंसानों को दिया जाता हालांकि डॉ अतुल कक्कड़ कहते हैं कि इसराइल के परीक्षण की जानकारी आने के बाद ही पता चलेगा कि ये तरीका कोरोना वायरस पर कितना काम कर सकता है. वो कहते हैं, जब तक पेपर पब्लिश नहीं होगा और हमें डिटेल नहीं मिलेंगी तब तक कुछ कह नहीं सकते. रक्षा मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक़, रक्षा मंत्री को लैब में वो एंटीबॉडी दिखाई गई जो वायरस पर मोनोक्लोनल तरीके से हमला करती है और बीमार व्यक्ति के शरीर में वायरस को बेअसर कर देती है.


बयान के अनुसार, एंटीबॉडी को विकसित करने का काम पूरा हो चुका है और संस्थान "इसे पेटेंट कराने की प्रक्रिया में है". इस प्रक्रिया के अगले चरण में, रिसर्चर अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क करेंगे ताकि वाणिज्यिक स्तर पर एंटीबॉडी का उत्पादन किया जा सके. रक्षा मंत्री बेनेट ने कहा, "मुझे इस महत्वपूर्ण सफलता के लिए संस्थान के कर्मचारियों पर गर्व है, उनकी रचनात्मकता ने इस उपलब्धि की खोज का मार्ग प्रशस्त किया." जैविक संस्थान एक विश्व-प्रसिद्ध अनुसंधान और डेवलपमेंट एजेंसी है और इसमें 50 से अधिक अनुभवी वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के संभावित साइड इफेक्ट हालांकि बहुत कम मामलों में इतना गंभीर रिएक्शन होता है कि इंसान की मौत हो जाए. उस स्थिति में कैपिलरी लीक सिंड्रोम हो सकता है, जिसमें छोटी रक्त वाहिकाओं में से तरल पदार्थ और प्रोटीन लीक होकर आस-पास के टिश्यू में जा सकता है. जिसकी वजह से बल्ड प्रेशर बहुत कम हो सकता है. कैपिलरी लीक सिड्रोम की वजह से मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का डर हो सकता है. पुहंची थी. तभी से वहां वैक्सीन दुनियाभर में रिसर्च टीमें कोविडका दावा भी किया, लेकिन अभी दुनियाभर में रिसर्च टीमें कोविड-19 की वैक्सीन बनाने में जुटी हैं. कई सरकारी और प्राइवेट संस्थाओं ने कोविड-19 का इलाज ढूंढ लेने का दावा भी किया, लेकिन अभी तक किसी की भी पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो सकी है.


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