कोरोना वायरसः किसी सतह पर कितनी देर जिंदा रहता है ये विषाणु हाथ और आस-पास के वातावरण को साफ़ रखकर ही हराया जा सकता है.


नए कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते इन दिनों दुनिया भर में बड़े पैमाने पर सैनिटाइज़ेशन का काम चल रहा है. बाज़ारों में, सड़कों पर, घर की सोसाइटी में, यहां तक की एटीएम मशीन तक को सैनिटाइज़ किया जा रहा है. जिन दफ्तरों में अभी भी काम किया जा रहा है वहां कर्मचारियों के घुसने से पहले पूरे ऑफ़िस की अच्छे से साफ़-सफ़ाई हो रही है. कीटनाशक छिड़के जा रहे हैं. कोरोनावायरस संक्रमण के बाद शरीर में क्या बदलाव होते हैं?


कीटाणुओं से मुक्ति सिर्फ एक बार खांसने पर मुंह से करीब तीन हज़ार बूंदें निकलती हैं. ये छोटी-छोटी बूंदें आस-पास रखे सामान, कपड़ों वगैरह की सतह पर गिरती हैं. और जो बूंदे बहुत ही ज्यादा छोटी होती हैं, वो हवा में ही तैरती रहती हैं. यहां तक कि अगर कोई शौचालय से आकर हाथ नहीं धोता है और किसी चीज़ को छू लेता है, तो वो उस वस्तु को संक्रमित कर देता है.



रिसर्च जारी है... हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि कितने लोग संक्रमित जगह छूने से कोरोना के शिकार हुए हैं. अभी तक साफ़ तौर पर ये भी पता नहीं चल पाया है कि कोविड-19 का वायरस इंसान के शरीर के बाहर कितनी देर ज़िंदा रहता है. कोरोना परिवार के अन्य वायरस जैसे सार्स (SARS) और मर्स (MERS) के वायरस मेटल, शीशा और प्लास्टिक पर 9 दिन तक जिंदा रहते हैं. हवा में तीन घंटे तक और इस दिशा में अमरीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (NIH) की रिसर्चर नीलजे वान डोरमलेन और उनके साथी पहला टेस्ट कर भी चुके हैं. इनकी रिसर्च के मुताबिक़ कोविड-19 वायरस खांसने के बाद हवा में तीन घंटे तक जिंदा रह सकता है. जबकि खांसने पर मुंह से निकले 1 से 5 माइक्रोमीटर साइज़ के ड्रॉपलेट हवा में कई घंटों तक जिंदा रह सकते हैं. NIH की रिसर्च के मुताबिक़ SARS-CoV-2 वायरस, गत्ते पर 24 घंटे तक जिंदा रहता है. जबकि प्लास्टिक और स्टील की सतह पर 2 से 3 दिन तक जिंदा रहता है.


कोरोना वायरस रिसर्च ये भी कहती हैं कि 62-71 फ़ीसद अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र से कोरोना के वायरस को मिनट भर में निष्क्रिय किया जा सकता है. इसके लिए 0.5 फ़ीसद हाइड्रोजन परॉक्साइड ब्लीच या 0.1 फ़ीसद सोडिम हाइपोक्लोराइट वाली घरेलू ब्लीच भी इस काम के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. इसके अलावा नमी और तेज़ तापमान भी इसे ख़त्म करने में सहायक हो सकते हैं


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आस-पास का वातावरण रिसर्चरों का कहना है कि इंसान के शरीर में इस वायरस के जाने के बहुत से तरीके हो सकते हैं. अभी रिसर्च के लिए ये वायरस नया है लिहाज़ा किसी भी बात पर आंख मूंद कर यक़ीन नहीं किया जा सकता. लेकिन एक बात पर तो किया ही जा सकता है. नए कोरोना वायरस को हाथ और आस-पास के वातावरण को साफ़ रखकर ही हराया जा सकता है. जब तक रिसर्च की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं आ जाती आप हाथों को साबुन से साफ़ रखिए और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखिए.


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