स्वार्थों की जनसेवा"??*  *शायद बनावटी मूल्यों,आदर्शों,चाल-चरित्रों, और (ई)मानदार चेहरों की वास्तविक परिभाषा का दर्शन इससे बेहतर हो ही नहीं सकता है!!*के.के.मिश्रा* -

*कांग्रेस में रहकर  "जनसेवा" को अपना "कथित कर्म" बता, असहज महसूस हो रहे व अब अपने पूर्वजों के साथ मिल चुके "श्रीअन्त ज्योतिरादित्य सिंधिया" को "जनसेवा" की कितनी चिंता है,उसका उदाहरण संलग्न ऑडियो है, जिसमें वे कोरोना के क़हर की त्रासदी झेल रहे, देश के तीसरे नंबर के  राज्य के नागरिकों से उनकी कुशलक्षेम व उनकी सहायता की चर्चा न करते हुए एक नागरिक (मुरैना के श्री मुरारीलाल जी) से लॉक डाउन खुलने के बाद कांग्रेस का साथ न देने व "श्रीअन्त" से मिलने की अपील कर रहे हैं!!! इन स्थितियों में भी यह है "स्वार्थों की जनसेवा"??*
 *शायद बनावटी मूल्यों,आदर्शों,चाल-चरित्रों, और (ई)मानदार चेहरों की वास्तविक परिभाषा का दर्शन इससे बेहतर हो ही नहीं सकता है!!*


       *सादर*


          *के.के.मिश्रा*