सेना के काफिले में घुसकर जिस कार से विस्फोट के बाद हमारे कई सैनिक शहीद हुए थेएवह कार किसकी किसके नाम पर रजिस्टर्ड थी सीबीआई आज तक कोई खुलासा क्यों न कर सकी - के.के. मिश्रा


पुलवामा पठानकोठ आतंकी हमलों तथा सर्जिकल स्ट्राइक आदि पर सत्ता में रहकर और विपक्ष में रहते हुए देश के प्रधानमंत्री गृह मंत्री रक्षा मंत्री सहित अन्य जवाबदारों के जो पृथक-पृथक दोहरे चरित्र का स्पष्ट अंतर प्रदर्शित करने वाले जो प्रामाणिक बयान सामने आ रहे हैंएवह उनकी वास्तविक देशभक्ति कथित राष्ट्रवाद राजनैतिक विचारधारा चाल चरित्र और चेहरे को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं!!



कृपाकर इसे पूरा पढ़िए और विचार कीजिये......बहुत सारे भक्त संवेदनशील मुद्दों पर केंद्र की घोर लापरवाही व संदिग्ध आचरण पर उठने वाली आवाजों के ख़िलाफ़ चापलूसी भरे दोयम दर्जे का ज्ञान पेलते हुई खुद को राष्ट्रवादी होने का स्वांग रच ऐसी आवाज़ उठाने वालों को "राष्ट्रद्रोही" करार करने की नाकाम कोशिशें करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं। पुलवामा पठानकोठ आतंकी हमलों तथा सर्जिकल स्ट्राइक आदि पर सत्ता में रहकर और विपक्ष में रहते हुए देश के प्रधानमंत्रीएगृह मंत्रीएरक्षा मंत्री सहित अन्य जवाबदारों के जो पृथकपृथकपदोहरे चरित्र का स्पष्ट अंतर प्रदर्शित करने वाले जो प्रामाणिक बयान सामने आ रहे हैंएवह उनकी वास्तविक देशभक्तिएकथित राष्ट्रवाद राजनैतिक विचारधाराएचालएचरित्र और चेहरे को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं!! __ऐसे कथित "ज्ञानचंदों" से मेरे कुछ प्रामाणिक/ विचारोत्तेजक सवाल हैंएजिनका उत्तर भी उनके पास नहीं हैसिवाय कुतर्कोए छद्म नामों से गाली बकनेएसवाल पूछने वालों को देशद्रोही करार देने केएकिन्तु आगे आने वाले दिनों में पूरा देश उनसे यह जरूर जानना चाहेगा कि --- 1द्ध भारतीय संसद पर हमला करने वाले आतंकवादियों से मिलवाने वालेएआतंकवादियों को अपने संरक्षण में दिल्ली ले जाने की कोशिश (इसके आसपास दिल्ली में चुनाव होने वाले थे) करते हुए कश्मीर में एक डीआइजी द्वारा रंगे हाथों पकड़ाए डीएसपी देवेंद्रसिंहएजो पुलवामा आतंकी हमले में भी यहीं पदस्थ था!! उसने गिरफ्तारी के दौरान डीआयजी से यह भी कहा था किएआपने सारा खेल बिगाड़ दिया" इसके निहितार्थ क्या सीबीआई द्वारा 90 दिनों तक कोर्ट में चालान पेश न करने के कारण जमानत पर छूट गया हैयह एक गंभीर लापरवाही है या कोई षड्यंत्र इतनी बड़ी खबर क्यों छपाई गईण्ड्सके दोषियों पर कार्यवाही क्यों नहीं ;2द्धविधि अनुसार किसी भी अपराध में जांच एजेंसी को 90 छपाई गईण्ड्सके दोषियों पर कार्यवाही क्यों नहीं ;2द्धविधि अनुसार किसी भी अपराध में जांच एजेंसी को 90 दिनों के भीतर कोर्ट में चालान प्रस्तुत करना होता हैएप्रकरण में अनुसंधान यदि लंबा होता है तो अंतरिम चालान पेश किया जाता है ताकि अपराधी जमानत पर न छूट सके।देश की विश्वस्तएमहत्वपूर्ण जांच एजेंसी का यह कृत्य किसी षड्यंत्र से कम है___मप्र में 20 सालों पूर्व एक अनुसंधान में एक अन्य प्रकरण में एक टीआई की बर्खास्तगी हुई थीएमोनिका बेदी प्रकरण में भी एक टीआई को डिग्रेट कर सब इंस्पेक्टर बना दिया गया थाए किंतु इस मामले पर केंद्र सरकार खामोश 3द्धइसी तरह श्र-ज्ञ में सेना के काफिले में घुसकर जिस कार से विस्फोट के बाद हमारे कई सैनिक शहीद हुए थेएवह कार किसकीएकिसके नाम पर रजिस्टर्ड थी सीबीआई आज तक कोई खुलासा क्यों न कर सकीट उल्लेखनीय हैएइस विस्फोट के आसपास भी देश में लोकसभा चुनाव होने वाले थे और सेना की इस बस में सभी प्रान्तों के सैनिक बैठे हुए थेएजिन्हें सड़क मार्ग से न ले जाकर वायु मार्ग से ले जाने का थेएजिन्हें सड़क मार्ग से न ले जाकर वायु मार्ग से ले जाने का गुप्तचर एजेंसियों का इनपुट गृह मंत्रालय के पास थाएजिसकी अनदेखी क्यों की गई थी ;4द्ध हाल ही में भारत की गलवन घाटी में हुई हिंसक मुठभेड़ में हमारे 20 निहत्थे सैनिकों" की शहीदी हुईए भारतचीन सीमा पर तनाव की आशंका पहले से ही थी। केंद्र के जवाबदारों का कहना है "सैनिक निहत्थे नहीं थे"एकिन्तु रेजिमेंट के जवानों व एक शहीद के दुःखी पिता ने कहा कि "हमारे सैनिक (बेटा) निहत्थे थे!!" सच्चे हमारे डरपोक राजनेता हैं बहादुर सैनिक या शहीद सैनिकों के परिजन यहां मैं फिर उल्लेख करना चाहूंगा कि भारत-चीन सीमा पर हुई इस हिंसक झड़प में भी 20 बहादुर शहीदों व 17 घायल सैनिकों में अधिकांश बिहार रेजिमेंट (जहां आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं) के हैं हमें यह भी स्मरण रखना होगा कि बिहार में कल ही शनिवार 20 जून 2020 को एक योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री जी ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के साथ किया है!! मैं ऐसा मानता हूं कि पहली बार गलती होती हैएदूसरी बार संयोग और यदि लगातार ऐसा होता दिखाई दे रहा है तो वह न तो गलती हैएन संयोग है यह है- निरन्तर होने वाला "सियासी इत्तेफाक"....आखिरकार सियासी जीत की तारीख हमारे जवानों के खून से कब तक लिखी जाती रहेगीछ अंधराष्ट्रवादियों को मेरे यह लब्ज़ भले ही दर्द पहुंचाए किन्तु मैं मानसिक गुलामएचापलूस न होकर स्वतंत्रता अंधराष्ट्रवादियों को मेरे यह लब्ज़ भले ही दर्द पहुंचाए किन्तु मैं मानसिक गुलामएचापलूस न होकर स्वतंत्रता संग्रामएफौजी व पुलिस परिवार का खून हूँ।लिहाज़ाएअपने विचारों को मैं रोक नहीं पाऊंगा.... यही कहूंगा कि " दुश्मनों के हाथों हमारी सीमाओं पर भूने कौन और सियासी इत्तेफ़ाको से उसे श्भुनाए कौन...यदि हम सच्चे देशभक्त हैंएतो सोचिये


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