कोरोना वायरस ज़्यादा लंबे वक़्त तक मल पर टिक सकता है,

Sars-CoV-2 वायरस कार्डबोर्ड पर 24 घंटे तक और प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतहों पर 2-3 दिन तक टिका रह सकता है.



कोविड-19 फैल रहा है और इसके साथ ही किसी भी सतह को छूने का हमारा डर भी बढ़ रहा है. अब पूरी दुनिया में सार्वजनिक जगहों पर एक जैसी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं. लोग अपनी कोहनी से दरवाजे खोलने की कोशिश कर रहे ट्रेनों के ज़रिए आवाजाही करने वाले लोग इसके हैंडल पकड़ने से बच रहे हैं. ऑफ़िस कर्मचारी हर सुबह अपनी डेस्क साफ़ करते दिखाई दे रहे हैं. साफ़-सफ़ाई पर बढ़ा ज़ोर कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए इलाक़ों में वर्कर्स को प्रोटेक्टिव कपड़े भेजे जा रहे हैं. ये टीमें प्लाज़ा, पार्कों और सड़कों पर डिसइन्फेक्टेंट्स (इनफेक्शन को रोकने वाली दवाइयों) का छिड़काव करती हैं. दफ्तरों, हॉस्पिटलों, दुकानों और रेस्टोरेंट्स में साफ़-सफ़ाई के इंतज़ाम पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा मुस्तैदी से किए जा रहे हैं. कुछ शहरों में वॉलंटियर्स तो रात के वक़्त जाकर कैश मशीनों (एटीएम) के की-पैड्स को भी साफ़ करते हैं. फ़्लू जैसे दूसरे रेस्पिरेटरी वायरस की तरह से ही कोविड-19 भी इससे संक्रमित शख़्स के छींकने या खांसने के जरिए मुंह और नाक से निकलने वाली पानी की बूंदों से भी फैल सकता है. हाथ से चेहरा छूना मुख्य वजह नहीं सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेशन (सीडीसी) के मुताबिक़, वायरस वाली किसी सतह या वस्तु को छूने के बाद अपने चेहरे को छूना 'वायरस के फैलने की मुख्य वजह नहीं मानी गई है.' इसके बावजूद सीडीसी, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (डब्ल्यूएचओ) और दूसरे अन्य स्वास्थ्य संस्थानों ने इस बात पर जोर दिया है कि हाथ धोना और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को रोज़ साफ़ करना इस वायरस को फैलने से रोकने का एक अहम उपाय है. हालांकि, हमें यह नहीं पता कि संक्रमित सतहों को छूने से इस वायरस के फैलने के कितने मामले आए हैं, लेकिन एक्सपर्ट फिर भी इस मामले में सतर्कता बरतने की बात करते हैं. 28 दिन तक टिक सकता है वायरस सार्स और मर्स जैसे दूसरे कोरोना वायरस पर हुए कुछ अध्ययनों में पता चला था कि ये मेटल, ग्लास और प्लास्टिक पर नौ दिन तक जीवित रह सकते हैं. कम तापमान में कुछ वायरस 28 दिन तक टिके रह सकते हैं. कोरोना वायरस को खासतौर पर इस बात के लिए जाना जाता है कि यह अपने अनुकूल माहौल में मज़बूती से टिका रहता है. शोध में हुए नए खुलासे शोधकर्ताओं को अब इस बारे में और ज़्यादा जानकारियां मिल रही हैं कि यह नए कोरोना वायरस के फैलाव को कैसे प्रभावित करता है. 1 से 5 माइक्रोमीटर के आकार वाली बड़ी बूंदें मानव बाल की मोटाई से करीब 30 गुना छोटी होती हैं. ये बूंदें कई घंटों तक हवा में बनी रह सकती हैं. इसका मतलब यह है कि वायरस बिना फ़िल्टर वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम्स में आने वाले वायरस केवल कुछ घंटों तक ही जीवित रह सकते हैं, खासतौर पर एयरोसोल बूंदें जल्द ही सतह पर टिक जाती हैं. कहां ज़्यादा जीवित नहीं रह पाता वायरस लेकिन, एनआईएच की स्टडी में पता चला है कि Sars-CoV-2 वायरस कार्डबोर्ड पर 24 घंटे तक और प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतहों पर 2-3 दिन तक टिका रह सकता है. इन जानकारियों से पता चल रहा है कि वायरस दरवाज़ों के हैंडल्स, प्लास्टिक कोटेड और लैमिनेटेड वर्कटॉप्स और दूसरी सख़्त सतहों पर ज़्यादा वक़्त के लिए जीवित बना रह सकता है. शोधकर्ताओं को पता चला है कि कॉपर की सतह पर यह वायरस क़रीब चार घंटे में ही मर जाता है. लेकिन, इसे तत्काल रोकने का एक विकल्प है. रिसर्च से पता चला है कि 62-71 फीसदी एल्कोहल या 0.5 फीसदी हाइड्रोजन परऑक्साइड ब्लीच या 0.1 फीसदी सोडियम हाइपोक्लोराइट वाली घरेलू ब्लीच से सतह को साफ़ करने से कोरोना वायरस को एक मिनट के भीतर निष्क्रिय किया जा सकता है. ज़्यादा तापमान और यूमिडिटी में भी असरदार ज़्यादा टेंपरेचर और ह्यूमिडिटी में भी दूसरे कोरोना वायरस तेज़ी से ख़त्म हो जाते हैं. हालांकि, रिसर्च से पता चलता है कि सार्स बीमारी की वजह बनने वाले संबंधित कोरोना वायरस 56 डिग्री सेल्सियस या 132 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर के तापमान पर मर सकते हैं. यूएस एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए) ने अब डिसइनफेक्टेंट्स और एक्टिव इनग्रेडिएंट्स की एक लिस्ट जारी की है जिनके जरिए Sars-CoV-2 वायरस को खत्म किया जा सकता है. हालांकि, इस बात का कोई डेटा नहीं है कि किसी संक्रमित शख्स के छींकने से निकलने वाली एक बूंद में कितने वायरस पार्टिकल हो सकते हैं, लेकिन फ़्लू वायरस पर की गई रिसर्च से पता चलता है कि छोटी बूंदों में इंफ्लूएंजा वायरस की दसियों हज़ार कॉपी हो सकती हालांकि, यह चीज़ वायरस पर भी निर्भर करती है कि वह किस श्वसन तंत्र में पाया गया है और शख्स में संक्रमण किस स्टेज पर है. कपड़ों और ऐसी दूसरी सतह जिन्हें डिसइनफेक्ट करना मुश्किल होता है, यह अभी साफ़ नहीं है कि इनमें वायरस कितनी देर तक टिक सकता है.


छिद्रदार सतह पर सूख जाता है वायरस रॉकी माउंटेन लैबोरेटरीज में वायरस ईकोलॉजी के हेड और एनआईएच की स्टडी की अगुवाई करने वाले विंसेंट मन्सटर के मुताबिक़, कार्डबोर्ड में मौजूद एब्जॉर्बेट नैचुरल फाइबर में वायरस प्लास्टिक और मेटल के मुकाबले जल्द मर जाता है. उन्होंने कहा, "हमारा अंदाज़ा है कि छिद्रपूर्ण (पोरस) मैटेरियल की वजह से यह वायरस जल्द ही सूख जाता है और फ़ाइबर में फंस जाता तापमान में बदलाव और ह्यूमिडिटी से भी वायरस को ज़्यादा देर टिकने में मुश्किल होती है. इससे यह भी पता चलता है कि क्यों यह हवा में मौजूद बूंदों में कम देर टिकता है. उन्होंने कहा, "हम फ़िलहाल आगे के प्रयोग कर रहे हैं ताकि तापमान और ह्यूमिडिटी के असर को और ज़्यादा बारीकी से समझ सकें." मन्सटर के मुताबिक़, वायरस के ज़्यादा लंबे वक़्त तक टिके रहने से पता चलता है कि क्यों हमें हाथों की सफाई और सतहों को साफ़ रखने पर ज़्यादा ज़ोर देना चाहिए. उन्होंने कहा, "इस वायरस में कई ज़रियों से एक जगह से दूसरी जगह पर फैलने की संभावना होती है."


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