तीन हजार करोड़ रुपए के ई-टेंडर घोटाले का खुलासा करने वाले 1994 बैच के आईएएस अफसर मनीष रस्तोगी को रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान* का *प्रमुख सचिव बनाया गया है। - जाफर खान प्रवक्ता और उपाध्यक्ष मीडिया विभाग मध्यप्रदेश कांग्रेस

*तीन हजार करोड़ रुपए के ई-टेंडर घोटाले का खुलासा करने वाले 1994 बैच के आईएएस अफसर मनीष रस्तोगी को रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान* का *प्रमुख सचिव बनाया गया है। रस्तोगी जब 2018 में मप्र इलेक्ट्रोनिक्स डेवलपमेंट कारपोरेशन में सचिव व एमडी थे, तब उन्होंने ही ई-टेंडर घोटाला पकड़ा था। जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण, पीएचई, जल निगम, पीआईयू सहित सात विभागों के अफसरों ने ऑस्मो आईटी साॅल्यूशंस प्रा.लि. कंपनी के* *पदाधिकारियों से मिलकर ई-टेंडरों की मूल बिड वेल्यू बदलने के मामले को रस्तोगी ने गंभीरता से लिया था और इसे उजागर करते हुए सभी विभागों के विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर जांच करने और फिर से टेंडर करने की मांग की थी। इससे नाराज होकर शिवराज सिंह चौहान ने अपने पूर्व मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल में रस्तोगी को हटा कर प्रमोद अग्रवाल को एसईडीसी में पदस्थ कर दिया था। रस्तोगी को हटाने पर कई सवाल खडे हुए थे, बाद में जब इस घोटाले की ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज कर जांच शुरु की तो रस्तोगी के भी बयान दर्ज किए थे। उन्होंने घोटाला रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाया था, इसे ईओडब्ल्यू ने जांच में शामिल किया था*।
*ई-टेंडर घोटाले का खुलासा करने के बाद रस्तोगी से, शिवराज नाराज हो उठे थे, लेकिन अब शिवराज ने उन्हें अपनी गुडबुक में शामिल कर अपना प्रमुख सचिव बनाया है*।
*कहीं, नरोत्तम पर लगाम का एजेंडा तो नहीं*…
*हाल ही में कांग्रेस को बेदखल कर सत्ता में आई भाजपा के मुख्यमंत्री पद की दौड में पूर्व जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी शामिल थे। जल संसाधन विभाग के ही सबसे अधिक मामले ई-टेंडर घोटाले में सामने आए हैं, ऐसे में शिवराज सिंह, रस्तोगी के जरिए नरोत्तम पर नकेल तो नहीं कसना चाहते हैं?। रस्तोगी के आदेश होने के बाद एसईडीसी और ईओडब्ल्यू के अफसरों के बीच यही सवाल चर्चा में है। क्योंकि रस्तोगी को ई-टेंडर घोटाले की पूरी बारीकियां याद है और इसमें किसकी भूमिका है और किसके कहने पर टेंडरों में अनाधिकृत एक्सेस की गई, इसकी जानकारी भी रस्तोगी को है*।


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