"बन्धन की जंजीर"

[.                         "बन्धन की जंजीर"


          एक सन्त कुएँ पर स्वयं को जंजीर से लटका कर ध्यान करता था और कहता था जिस दिन यह जंजीर टूटेगी मुझे ईश्वर मिल जायेंगे। उनसे पूरा गांव प्रभावित था सभी उनकी भक्ति, उनके तप की तारीफें करते थे। 
          एक व्यक्ति के मन में इच्छा हुई कि मैं भी ईश्वर दर्शन करूँ। वह भी कुएँ पर रस्सी से पैर को बाँधकर कुएँ में लटक गया और कृष्ण जी का ध्यान करने लगा। थोडे समय बाद जब रस्सी टूटी उसे कृष्ण अपनी गोद मे उठा लिए और दर्शन भी दिए।
          तब व्यक्ति ने पूछा आप इतनी जल्दी मुझे दर्शन देने क्यों चले आये जबकि वे सन्त महात्मा तो वर्षों से आपको बुला रहे हैं। कृष्ण बोले, "वो कुएँ पर लटकते जरूर हैं किन्तु पैर को लोहे की जंजीर से बाँधकर। उन्हें मुझसे ज्यादा जंजीर पर विश्वास है। तुमने खुद से ज्यादा मुझ पर विश्वास किया इसलिए मैं आ गया।"
          आवश्यक नहीं कि दर्शन में वर्षों लगें आपकी शरणागति आपको ईश्वर के दर्शन अवश्य कराएगी और शीघ्र ही कराएगी। प्रश्न केवल इतना है आप उन पर कितना विश्वास करते हैं।
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                            "जय जय श्री राधे"