औरंगाबाद रेल दुर्घटना में जीवित बचा जिले का एक मात्र श्रमिक वीरेंद्र सिंह आईसोलेट में रहने का लिया साहसिक निर्णय


उमरिया - औरंगाबाद में 7 मई को हुए रेल हादसे में उमरिया एवं शहडोल जिले के 16 श्रमिकों की मौत हो गई थी। इन श्रमिकों में पांच श्रमिक उमरिया जिले के भी थे। इस रेल दुर्घटना में ग्राम ममान निवासी श्रमिक वीरेंद्र सिंह जीवित बचे है। उनके छोटे भाई बिगेंद्र सिंह अन्य साथियों की मौत उनकी आंखों के सामने हुई। बिगेंद्र सिह का कहना है कि जैसे ही आंखे मूंदते है तो घटना स्थल जलाना का वह रेल ट्रेक नजर आने लगता है ए जहां छोटा भाई बिगेंद्र मेरे समीप तथा अन्य श्रमिक साथी आस पास लेटकर आराम कर रहे थेइस घटना के बाद भी विरेंद्र सिंह ने पारिवारिक महत्व की जगह सामाजिक एवं ग्राम की सुरक्षा को अधिक महत्व देने का निर्णय लिया है।


गांव के लोगों एवं पारिवारिक सदस्यों की सुरक्षा हेतु उन्होंने प्रशासन द्वारा प्रवासी मजदूरों हेतु जारी गाईड लाईन का पालन करते हुए सुरक्षात्मक उपाय अपनाने का निर्णय लिया तथा स्वयं को 14 दिन के लिए आइसोलेट कर लिया है। ग्राम पंचायत द्वारा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जमुडी में उनके आईसोलेशन की व्यवस्था की गई है। विरेंद्र सिंह के इस साहसिक निर्णय की सर्वत्र सराहना हो रही है । उनका कहना है कि परिस्थितियां चाहे जो भी हो जिले एवं अपने गांव तथा समाज की सुरक्षा हेतु जिले एवं प्रदेश के बाहर से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आईसोलेशन एवं क्वारेंटाईन में रहने का दायित्व अवश्य निर्वहन करना चाहिए। हम सबको जिला प्रशासन के साथ सहयोगात्मक एवं सुरक्षात्मक उपायो का पालन करना चाहिए


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