किसानों की कर्ज माफी का फैसला बैंकों तक कब पहुंचेगा : सुदेश

(राकेश शौण्डिक-राँची/झारखंड)* आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और विधायक दल के नेता सुदेश कुमार महतो ने लॉकडाउन संकट में किसानों की दयनीय हालत पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार की योजनाएं और तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानो की कर्ज माफी का फैसला फाईल से निकलकर बैंकों तक कब पहुँचेगा? किसानों की कर्जमाफी से सरकार मुंह क्यों मोड़ रही है? उन्होंने कहा कि बजट में दो हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। हालांकि कर्ज की तुलना में यह बेहद कम है। बावजूद इसके सरकार यदि दो हजार करोड़ रुपए भी माफ कर देती, तो किसान दबाव से थोड़ी बहुत बच पाते। श्री महतो ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र में 5 मार्च को उन्होंने अल्पसूचित प्रश्न के जरिए किसानों की कर्जमाफी को लेकर सरकार की मंशा के बारे में पूछा था। जिसके जवाब में सरकार ने माना था कि राज्य के किसानों पर 7 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसके बाद भी बजट में कर्जमाफी को लेकर महज 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। नई सरकार गठन के पांच महीने होने को हैं और बजट सत्र के ढाई महीने बीत रहे हैं, लेकिन किसानों की कर्जमाफी को लेकर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। जबकि मार्च से ही किसानों समेत पूरे राज्य को लॉकडाउन का सामना करना पड़ा है। आजसू अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के वक्त सत्तरूढ़ दलों ने खुद को किसानों और मजदूरों का सबसे बड़ा हिमायती बताया था। लॉकडाउन में राज्य के कई इलाकों में खेतों में सब्जियां और फलों की पैदावार अच्छी हुई, लेकिन खरीदार नहीं मिलने की वजह से किसान आंसू पीकर रहने को विवश हैं। हाट- बाजार बंद हैं। सरकार की वेजफेड योजना भी प्रभावकारी नहीं हो पा रही हैं। किसानों ने बड़े पैमाने पर धान बेचे हैं, लेकिन लैंपस और सहकारी समितियों से समय पर पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है।खेती को आगे बढ़ाने और घर- परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए किसानों के खाते में तत्काल पैसे भेजे जाने की जरूरत थी। पूर्व सरकार की वह योजना भी बंद कर दी गई।


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