कोरोना लॉकडाउन: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से कोरोना वायरस संकट के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर चर्चा की.


कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से कोरोना वायरस संकट के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर चर्चा की. राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट पर रघुरान राजन और उनके बीच बातचीत का प्रसारण आज (गुरुवार) सुबह प्रसारित हुआ था. इस दौरान दोनों ने कोरोना वायरस के चलते विश्वभर में उत्पन्न आर्थिक संकट और भारत के सामने मौजूद चुनौतियों व समाधान पर चर्चा की.रघुराम राजन ने गरीबों और मजदूरों तक मदद पहुंचाने के तरीकों पर बात की और बताया कि 65 हज़ार करोड़ की रक़म से गरीबों को मदद मिल सकती हन साथ ही उन्होंने लोगों में भरोसा पन करने और रणनीतिक रूप से लॉकडाउन खोलने पर अपनी राय रखी. को खुले लॉकडाउन तीन मई को लॉकडाउन के दूसरे चरण की समयसीमा खत्म होने जा रही हखराहुल गांधी ने शुरुआत लॉकडाउन खोलने से जुड़ी चुनौतियों से की. उन्होंने पूछा कि आपको क्या लगता हखक अर्थव्यवस्था के वो कौन-से हिस्से हैं जिन्हें खोला जाना महत्वपूर्ण हैं और इन्हें किस क्रम में खोलना चाहिए. रघुराम राजन ने कहा कि जखा कि हम इस महामारी को रोकन की कोशिश कर रहे हैं ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोझ कम हो. साथ ही हमें लोगों के जीवनयापन के बारे में भी सोचना चाहिए. हमें दफ़्तरों को सुरक्षित बनाना चाहिए. यहां तक दूसरी जगहों पर भी डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए. ये दूरी दफ्तरों में ही नहीं बल्कि परिवहन में भी होनी चाहिए. सार्वजनिक वाहनों में इसे बनाए रखने के लिए काफ़ी काम किया जाना ज़रूरी 


टेस्टिंग की क्षमता राहुल गांधी ने पूछा कि भारत में टेस्टिंग की क्षमता अपने आप में सीमित हलहम एक बड़े देश हैं. अमरीका और यूरोप के मुकाबले हमारी टेस्टिंग की क्षमता सीमित हख अर्थशास्त्री रघुराम राजन का कहना था कि लॉकडाउन खोलने में टेस्टिंग भी एक अहम पहलू हलअमरीका की बात करें तो वहां हर दिन एक लाख 50 हज़ार टेस्ट हो रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना हखक लॉकडाउन खोलने पर इसे तीन गुना करना होगा ताकि संक्रमित लोगों का पता लगाया जा सके. इस तरह भारत में ये संख्या बहुत बड़ी होगी जो पूरा कर पाना बहुत मुश्किल हनइसलिए लॉकडाउन खोलने के लिए बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होगा. कोरोना वायरस से भारत के लिए फ़ायदा? उन्होंने कहा कि आंकड़ों में मतभेद हो सकता हख्लेकिन इस संबंध में कदम उठाने होंगे. वखिक अर्थव्यवस्था में समस्या से जुड़े एक सवाल पर रघुराम राजन ने कहा कि उन्हें लगता हखक वखिक आर्थिक प्रणाली में कुछ तो गलत हनलोगों के पास नौकरी नहीं हखजिनके पास नौकरी हकन्हें आगे की चिंता हऔर आय का असमान वितरण हो रहा हलहमें अवसरों का सही वितरण करना होगा.


कृषि क्षेत्र और मजदूर राहुल गांधी के कृषि क्षेत्र और मज़दूरों को लेकर किए गए सवाल पर रघुराम राजन ने कहा कि हमें डायरेक्ट ट्रांसफ़र पर ध्यान देना चाहिए जखे मनरेगा, विधवा पेंशन आदि. हमें लोगों तक पखे और खाना पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा, “गरीबों की मदद के लिए 65 हज़ार करोड़ रुपयों की ज़रूरत हखभारत का जीडीपी 200 लाख करोड़ हखऐसे में 65 हज़ार करोड़ ज़्यादा बड़ी रकम नहीं. उनकी जिंदगी बचाने के लिए ऐसा कर सकते हैं." सामाजिक विभिन्नता और उसकी ज़रूरतें अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने कहा कि हमारे पास लोगों के जीवन को बेहतर करने का तरीका हख़खाने, स्वास्थ्य और शिक्षा पर कई राज्यों राज्यों ने अच्छा काम किया हलहमें सिर्फ नौकरियां नहीं देनी होगी बल्कि अच्छी नौकरियां देनी होंगे. उनके लिए नए अवसर पब करने होंगे. सामाजिक सद्भाव की ज़रूरत राहुल गांधी की यह बातचीत दरअसल कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सीरीज़ की शुरुआत हनइस सीरीज़ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बात करेंगे और देश में मौजूद संकट पर चर्चा करेंगे.


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