महिलाओं की आजीविका का बेहतर माध्यम बन रहा है शाहपुर का हाईटेक सिलाई सेंटर, लॉक-डाउन के दौरान तैयार किए 32 हजार मास्क, 96 हजार का शुद्ध लाभ प्राप्त किया


बैतूल । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए एक बेहतर प्लेटफार्म के रूप में सामने आ रहा है। मिशन अंतर्गत गठित स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अब विभिन्न आय के साधनों से जुडक़र आत्मनिर्भरता मिल रही है। जिले में मिशन अंतर्गत शाहपुर में स्थापित सिलाई सेंटर में आधुनिक सलाई मशीनें लगाई गई हैं, जिनसे प्रतिज्ञा महिला आजीविका संकुल स्तरीय संगठन की महिलाएं अब आधुनिक हाईटेक सिलाई मशीनों से पहले की अपेक्षा ज्यादा सिलाई कार्य सम्पन्न कर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं। वर्तमान में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय जिले में प्रभावशील लॉक-डाउन के दौरान इन महिलाओं द्वारा 10 दिनों में हाईटेक सिलाई सेंटर में 32 हजार मास्क का निर्माण कर ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायत एवं अन्य संस्थाओं को उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उन्हें लगभग 96 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एमएल त्यागी बताते हैं कि आजीविका मिशन अंतर्गत स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा संवहनीय आजीविका हेतु वर्ष 2018-19 में शाला गणवेश सिलाई का कार्य किया गया था, किन्तु सिलाई की आधुनिक मशीनों के न होने से महिलाओं को अत्यधिक श्रम करना पड़ा। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विकासखण्ड शाहपुर में गठित महिलाओं के संकुल स्तरीय संगठन प्रतिज्ञा आजीविका संकुल स्तरीय संगठन द्वारा हाईटेक मशीनों से युक्त सिलाई सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए संगठन की महिलाओं द्वारा पिछले वर्ष गणवेश सिलाई कार्य से हुई आमदनी में से एक हिस्सा बचाकर एवं शेष राशि हेतु 30 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से 30 लाख रूपए के नगद साख सीमा की स्वीकृति दिलाकर नई हाईटेक मशीने एवं आवश्यक सामग्री क्रय करने का निर्णय लिया। प्रशिक्षण के साथ मिला कार्य श्री त्यागी बताते हैं कि सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करने के पश्चात् जनपद पंचायत शाहपुर का सामुदायिक भवन महिलाओं के संकुल स्तरीय संगठन को आवंटित किया गया। जिसे तैयार कर 40 हाईटेक सिलाई मशीनों के साथ 29 जून 2019 को सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया गया। इस प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना पर लगभग 11.50 लाख रूपए की लागत आई। सिलाई केन्द्र पर प्रारंभ में सभी महिलाओं को नई सिलाई मशीन पर कार्य करने का 20 दिन का प्रशिक्षण दिया गया। इन्हें सिलाई का प्रशिक्षण मेसर्स राजा इन्टर प्राइजेस पिपरिया जिला होशंगाबाद द्वारा निष्पादित अनुबंध के अनुसार दिया गया। प्रशिक्षण के साथ ही लोअर एवं जैकेट सिलाई का कार्य भी दिया गया। महिलाओं में जागा आत्मविश्वास, बढ़ी आमदनी श्री त्यागी बताते हैं कि लोअर एवं जैकेट निर्माण का कार्य मिलने से महिलाओं को आत्मविश्वास आने लगा और वे इस कार्य को आसानी से स्पीड के साथ करने लगीं। इस कार्य के लिए महिलाओं को संबंधित संस्था से किए गए अनुबंध के अनुसार सिर्फ सिलाई कार्य करने पर प्रति माह प्रति महिला को पांच हजार रूपए आमदनी होने लगी। इस राशि से महिलाओं को घर का खर्च चलाने में आसानी हुई और परिवार को भी आगे बढ़ने में मदद मिलने लगी। उक्त सिलाई केन्द्र में वर्तमान में कुल 30 समूहों की 32 प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा कार्य किया जा रहा है। कोरोना की वैश्विक महामारी के दौरान इन महिलाओं को मास्क निर्माण कार्य से जोड़ा गया, जिससे वे लाभ अर्जित करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन रही