संजय भगत के नेतृत्व में सभी लोग प्रवासी लोगों के सेवा में लगे हुए लगातार दिन-रात एक करते हुए सबकी भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं

(राकेश शौण्डिक राँची: झारखंड)


संजय भगत के नेतृत्व में सभी लोग प्रवासी लोगों के सेवा में लगे हुए लगातार दिन-रात एक करते हुए सबकी भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहत चीजें थींए वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घण्टों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत निश्चित है । पर कहीं न कहीं उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा । तभी उसे एक झोपड़ी दिखाई दी उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था । पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद जो थी । वह अपनी बची खुची ताकत से झोंपड़ी की तरफ चलने लगा । जैसे-जैसे करीब पहुँचताए उसकी उम्मीद बढती जाती और इस बार भाग्य भी उसके साथ था सचमुच वहाँ एक झोंपड़ी थी पर यह क्या झोपडी तो वीरान पड़ी थी मानो सालों से कोई वहाँ भटका न हो फिर भी पानी की उम्मीद में वह व्यक्ति झोंपड़ी के अन्दर घुसा । अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ वहाँ एक हैण्ड पम्प लगा था वह व्यक्ति एक नयी उर्जा से भर गया ।


पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसता वह तेजी से हैण्ड पम्प को चलाने लगा । लेकिन हैण्ड पम्प तो कब का सूख चुका था । वह व्यक्ति निराश हो गयाए उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता वह निढाल होकर गिर पड़ा तभी उसे झोंपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी वह किसी तरह उसकी तरफ लपका और उसे खोलकर पीने ही वाला था कि तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज़ दिखा उस पर लिखा था - इस पानी का प्रयोग हैण्ड पम्प चलाने के लिए करो और वापिस बोतल भरकर रखना ना भूलना छ यह एक अजीब सी स्थिति थी उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे हैण्ड पम्प में डालकर चाल करे उसके मन में तमाम सवाल उठने लगेए अगर पानी डालने पर भी पम्प नहीं चला अगर यहाँ लिखी बात और क्या पता जमीन के नीचे का पानी भी सूख चुका हो । लेकिन क्या पता पम्प चल ही पड़ेए क्या पता यहाँ लिखी बात सच होए वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पम्प में डालने लगा। पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और पम्प चलाने लगा । एकए दोए तीन और हैण्ड पम्प से ठण्डा-ठण्डा पानी निकलने लगा वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था उस व्यक्ति ने जी भरकर पानी पियाए उसकी जान में जान आ गयी । दिमाग काम करने लगा । उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया जब वो ऐसा कर रहा थाए तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी ।


खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हआ थाए जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था । उस व्यक्ति ने रास्ता याद कर लिया और नक्शे वाली बोतल को वापस वहीं रख दिया इसके बाद उसने अपनी बोतलों में (जो पहले से ही उसके पास थी) पानी भरकर वहाँ से जाने लगा कुछ आगे बढ़कर उसने एक बार पीछे मुड़कर देखाए फिर कुछ सोचकर वापिस उस झोपड़ी में गया और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतारकर उस पर कुछ लिखने लगा उसने लिखा - *"मेरा यकीन करिए यह हैण्ड पम्प काम करता है यह कहानी सम्पूर्ण जीवन के बारे में है यह हमें सिखाती है कि बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोडनी चाहिए और इस कहानी से यह भी शिक्षा मिलती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया । देखा जाए तो इस कहानी में पानी जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता हैए कुछ ऐसी चीजें जिनकी हमारी नजरों में विशेष कीमत है । किसी के लिए मेरा यह सन्देश ज्ञान हो सकता है तो किसी के लिए प्रेम तो किसी और के लिए पैसा यह जो कुछ भी हैए उसे पाने के लिए पहले हमें अपनी तरफ से उसे कर्म रुपी हैण्ड पम्प में डालना होता है और फिर बदले में आप अपने योगदान से कहीं अधिक मात्रा में उसे वापिस पाते हैं ये सब इतना ही सत्य है जितने की आप और मैं। यकीन कीजिए ये हैंडपंप वाकई काम करता है |बस यकीन कीजिए एमित्र |


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