श्रमिक दिवस क्यों मनाया जाता है?

(राकेश शौण्डिक)


श्रमिक दिवस क्यों मनाया जाता है?


*आज अधिकांश देश 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाते हैं,* लेकिन हकीकत में यह अमेरिका में मजदूर के विद्रोह और शहादत का दिवस है। *1 मई के इतिहास पर जब हम नजर डालते हैं तो पता चलता है कि 1 मई 1886 के दिन‌ विश्व के कुछ ताकतवर देशों के मजदूरों ने अपने-अपने कारखानों के मालिकों के खिलाफ सड़कों पर उतर कर विद्रोह का बिगुल बजा दिया था, वो काम-धंधा छोड़कर जगह-जगह सड़कों पर हड़तालों पर बैठ गए थे।* उस दौरान अमेरिका के कल-कारखानों में काम करने वाले मजदूरों ने भी काम के घंटे कम करके आठ घंटे करने व अपनी अन्य लंबे समय से लम्बित मांग को लेकर काम बंद करके हड़ताल शुरुआत कर दी थी। *अभी हड़ताल शुरू हुए चार दिन भी पूरे नहीं हुए थे, कि 4 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो के हे-मार्केट में एक बम धमाका हो गया।* अपनी मांगों को लेकर देश में मजदूर पहले से ही सड़कों पर उतरे हुए थे। उसके चलते पूरे देश में हड़ताल से जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ था। इस धमाके ने अमेरिकी प्रशासन का धैर्य पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया था और वह मजदूर के प्रति उग्र हो गया।


*हे-मार्केट धमाके का यह मामला शिकागो, इलिनोइस, संयुक्त राज्य अमेरिका में आम हड़ताल के दौरान हुआ था,* जिसमें आम मज़दूर, कारीगर, व्यापारी और अप्रवासी लोग तक भारी संख्या में शामिल हुए थे। *पुलिस द्वारा गोली चलाए जाने और मेकॉर्मिक हार्वेस्टिंग मशीन कंपनी संयंत्र में चार हड़तालियों मजदूरों को मार डालने की एक घटना के बाद, अगले दिन जब हे-मार्केट स्क्वायर में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया।* यह रैली शांतिपूर्ण रही, लेकिन रैली के अंत में, जैसे ही पुलिस कार्यक्रम को तितर-बितर करने के लिए आगे बढ़ी, तभी एक अज्ञात हमलावर ने पुलिस की भीड़ पर एक बम फेंक दिया। इस बम धमाके के परिणामस्वरूप बाद में पुलिस कार्यवाही में पुलिस ने प्रदर्शनकारी मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। *बताया जाता है‌ कि इस गोलीबारी में दर्जनभर से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी।* इसके बाद दहशत का माहौल पूरे देश में फैल गया था। कई दिनों तक मजदूरों की नाराजगी के चलते देश के अधिकांश कल-कारखाने बंद रहे थे।


*इन दंगों ने सात पुलिसकर्मियों की भी जान ले ली थी।* जिस मामले में बाद में अमेरिका में एक बेहद सनसनीखेज़ ट्रायल चला, जिसमें आठ प्रतिवादियों की खुलेआम सुनवाई, जो कि उनकी राजनैतिक मान्यताओं को लेकर हुई, ना कि किसी बम विस्फोट में शामिल होने के लिए सुनवाई की गई। *जांच के अंत में उनमें से चार लोगों को सरेआम फांसी दे दी गई थी।* बाद में हे-मार्केट स्कवायर की यह घटना, दुनिया भर के मजदूर वर्ग के लोगों को जबरदस्त ढंग से आक्रोशित करने का बहुत बड़ा कारण बनी थी। लेकिन कुछ दिनों में धीरे-धीरे समय ने लोगों के जख्म भर दिये और सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो गया। हालांकि इस घटना के बाद कल-कारखानों के प्रबंधकों ने मजदूरों की बहुत सारी मांगों को मान लिया था। *कम्पनियों में आठ घंटे की शिफ्ट की शुरुआत यही से हुई थी।* उसके बाद पेरिस में सन् 1889 में फिर से एक बार मजदूर इकट्ठा हुए थे। *जिस कार्यक्रम को "अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन" का नाम दिया गया था।* 


*इसमें पहली बार 1886 के मई महीने में जान गवाने वाले मजदूरों को याद करते हुए 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का फैसला किया गया था।*


उसके बाद के वर्षों में, "हे-मार्केट शहीदों" की स्मृति को विभिन्न देशों में भी *"मई दिवस"* के रूप में याद किया जाने लगा। बाद में धीरे-धीरे मजदूरों ने 1 मई को खुद-ब-खुद छुट्टी मनानी शुरू कर दी। *इसके बाद मजदूरों संगठनों के दबाव में धीरे-धीरे विश्व के सभी प्रमुख देशों को 1 मई को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करना पड़ा।* हालांकि असल में वह कौन शख्स था जिसने 1 मई को मजदूर दिवस मनाने की पेशकश की थी, इसका आज तक पता नहीं चल पाया है, वैसे माना जाता है कि यह एक सर्वसम्मति से लिया गया फैसला था। *इसके बाद खुद-ब-खुद पूरी दुनिया के मजदूर इससे जुड़ते चले गए थे।*


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