विशाखापट्टनम गैस लीक जान बचा कर भागे लेकिन लॉकडाउन में कहां जाते जैसे-तैसे जान बची


मैं आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम शहर के दूर पद्मनाभापुरम गांव में रहता हूं. हम लोग पिछले एक साल से यहां रह रहे हैं. मेरे घर से विशाखापट्टनम तक पहुंचने के लिए किसी को आरआर वेंकटपुरम, गोपालापट्टनम और एनएडी इलाके से होकर गुजरना होता लॉकडाउन के चलते मैं इन दिनों अपने घर में ही कैद हूँ. बै वार को मुझे कुछ निजी काम से शहर जाना पड़ा. शहर पहुंचने के रास्ते में मैं उस फैक्ट्री के पास से भी गुजरा था जहां गुरुवार की सुबह गैस लीक होने की दुर्घटना हुई है.उन्होंने लगभग चिल्लाते हुए मुझसे कहा, "कब से दरवाजा पीट रही हूं. पॉलिमर्स में माका हो गया है. यहां से भागो." ये भी पढ़ें:आंध्र प्रदेश: एलजी पॉलिमर्स प्लांट से केमिकल गैस लीक, अब तक 13 मौत और सैकड़ों बीमार



पूरी हवा में भर गई थी गैस की गैं एलजी की पॉलिमर्स कंपनी में सुबह-सुबह गैस लीक की दुर्घटना हुई है. नागमणी का बेटा उसी कंपनी में काम करता है. पहले तो मैं नागमणी की बात ठीक से समझ नहीं पाया और ना ही उतनी सुबह मुझे स्थिति का कुछ अंदाज़ा हुआ. लेकिन हमने देखा कि लोग उन्हीं कपड़ों में गलियों में दौड़ रहे हैं, जो पहन कर सोए होंगे. लोग चिल्ला रहे थे, "अपने परिवार के साथ यहां से निकलो." इसके बाद मुझे हवा में गैस की गैं का एहसास हुआ. मेरी आंखों में जलन होने लगी. हमने घर से बाहर निकलने का फैसला लिया. रे-रे हवा में गैस की ग बढ़ती जा रही थी. मुझे पहले से ही सांस लेने में तकलीफ़ है. एक पल के लिए पैनिक जैसा एहसास भी हुआ.


जैसे-तैसे जान बची काफ़ी मुश्किलों के बाद हम सिमाचलम इलाके में पहुंच पाए. मैंने अपने दफ्तर को घटना की जानकारी दी और कुछ तस्वीरें भेज दी. जहां मैं अपने परिवार के साथ था वहां ढेरों लोग आते गए और जल्द ही वहां लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई. मेरे कुछ दोस्त भी अपने बच्चों के साथ वहां आ गए थे. हर कोई सुरक्षित जगह तक पहुंचने की कोशिश में था. * रे- ीरे गैस की मैं इस इलाके तक पहुंचने लगी. मैं आगे बढ़कर हनुमंता वाका जंक्शन तक पहुंचा. पूरा रास्ता लोगों से भरा हुआ था क्योंकि हर कोई सुरक्षित इलाके की तलाश में भाग रहा था. आखिर में हम विशाखापट्टनम में समुद्रतट पर पहुंच गए. समुद्रतट पर शांति थी और हवा में गैस का असर भी नहीं लग रहा था. मैं अब इस सोच में पड़ गया था कि लॉकडाउन को देखते हुए कहां जाएं? कौन हमें रखेगा? कई लोग दूसरे इलाके मेघाद्री गेड्डा की तरफ भाग रहे थे तो कई लोग सड़कों पर ही रूके हुए थे. जब मैं अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हो गया तब मैंने अपना काम शुरू किया.


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