कोरोना के चरम पर परीक्षाएं कराने का निर्णय अविवेकपूर्ण : अभय दुबे


भोपाल, आज कांग्रेस पार्टी के यशस्वी सांसद नाकुलनाथ जी ने मध्यप्रदेश के उच्चशिक्षा के विद्यार्थियों की भावनाओं से प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को अवगत कराते हुए अपील की है कि मध्यप्रदेश सरकार अंतिम वर्ष के कॉलेज के विद्यार्थियों की जून माह में ली जाने वाली परीक्षाओं पर पुनः विचार करें। अखिल भारतीय कांग्रेस के मीडिया कोर्डिनेटर अभय दुबे ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ये बेहद चौकाने वाली बात है कि जब कोरोना संक्रमण अपने चरम पर रहने की संभावना है तब सरकार लगभग 4 लाख विद्यार्थियों को 600 परीक्षा केंद्रों पर आने के लिए बाध्य करेगी । ज्ञातव्य है कि 370 शासकीय और 230 निजी महाविद्यालयों के केंद्रों पर ये परीक्षाएं आयोजित होगी अर्थात एवरेज एक केंद्र पर 666 विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जाएगा । सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कुछ केंद्रों पर तो लगभग 1500 विद्यार्थी परीक्षा हेतु शामिल होंगे , जबकि उन महाविद्यालयों की इतनी क्षमता भी नही है । सरकार ने ये निर्णय एक ऐसी कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर लिया है, जिसमें एक प्रमुख सचिव और तीन वाइसचांसलर थे, जबकि इस कमेटी में अनिवार्य रूप से एपिडेमियोलॉजिस्ट और अभिभावकों को भी होना चाहिए था । क्या इन केंद्रों पर सोशल डिस्टनसिंग के साथ बैठाने की पर्याप्त क्षमता होगी ? आज जब ऐम्स के निदेशक कह रहे है कि जून जुलाई में ये माहमारी भारत में अपने चरम होगी इतना ही नही मुख्यमंत्री जी भी जानते है कि प्रधानमंत्री जी ने स्वयं 27 अप्रेल को अपनी वीडियों कॉन्फ्रेंस ये बात कही थी कि जून जुलाई में एक स्पाइक आएगी । श्री दुबे ने बताया कि आयोग ने भी देश भर के चीफ सेकेट्रिस को अपने प्रेजेंटेशन में यह बात बताई है । अतः मध्यप्रदेश सरकार को चाहिए कि विद्यार्थियों की परीक्षा अगर कराना भी है तो उनके घरों पर ही प्रश्न पत्र भेज दिया जाए और एक निश्चित समयावधि में एक या दो दिनों में उसे वापस ले लिया जाए । जैसा कि विश्व की कई बड़ी यूनिवर्सिटीज में या आईआईटी में कई बार किया जाता है । महाराष्ट्र सरकार ने तो अपनी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं भी नही कराए जाने का निर्णय लिया है


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