कोरोना: रेलवे की आइसोलेशन बोगियों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहीं हैं राज्य सरकारें? झारखंड के हटिया यार्ड में खड़ी कुछ विशेष ट्रेनों की 60 बोगियां आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दी गई हैं.


झारखंड के हटिया याई में खड़ी कुछ विशेष ट्रेनों की 60 बोगियां आइसोलेशन वाई में तब्दील कर दी गई हैं. इसके लिए उनमें रेग्युलर बेडों को हटाकर ख़ास परिवर्तन किए गए हैं. अब इन बोगियों में कुल 480 बेड्स हैं. यहां कोविड-19 से संक्रमित या संक्रमण की आशंका वाले लोगों को आइसोलेट (अलग) किया जा सकता है. हर कोच में आठ आइसोलेशन बेड हैं. डॉक्टरों और नर्सी के रहने का इंतज़ाम है. पंखे लगे हैं. शौचालयों में से कुछ में बदलाव कर बाथरुम बनाए गए हैं. ताकि, यहां रहने वाले लोग नहा सकें. हालांकि बीबीसी पर आइसोलेशन बोगियों की स्टोरी पब्लिश होने के बाद रेलवे की ओर से एक ट्वीट किया गया. जिसमें बताया गया है कि रेलवे के पास 5231 कोविड कोच उपलब्ध हैं. ये कोच 215 अलग-अलग लोकेशन्स पर हैं. इससे पूर्व जब बीबीसी ने संबंधित अधिकारियों से इस बारे में जानना चाहा तो कोई जवाब नहीं मिल सका था.


श्रमिक ट्रेनों के बतौर इस्तेमाल का विकल्प रांची रेल मंडल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज कुमार ने बीबीसी को बताया कि रेलवे इनमें से 60 प्रतिशत बोगियों का इस्तेमाल श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए करने पर विचार कर रहा है. बशर्ते, इसकी ज़रुरत महसूस हो. हालांकि, अभी तक हमें इसकी ज़रुरत नहीं पड़ी है. "इन आइसोलेशन कोचेज के इस्तेमाल के लिए झारखंड सरकार इच्छुक है. इसके लिए निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएँ को नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है. इस आशय का पत्र झारखंड सरकार से मिला है. झारखंड सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधियों ने इन कोचेज का निरीक्षण भी किया था. जब भी सरकार माँगेगी, हमलोग ये आइसोलेशन कोचेज अविलंब उपलब्ध करा देंगे." 


कैसे हैं ये आइसोलेशन वार्ड रेलवे ने ऐसे हर कोच में आठ बेड की व्यवस्था की है, जो ज़रुरत पड़ने पर 16 बेडों में बदले जा सकते हैं. ये दरअसल द्वितीय श्रेणी के कोच हैं, जिनमें सेंट्रली काम करने वाले एयर कंडिशन (एसी) नहीं लगे होते हैं. इनकी खिड़कियां खोली जा सकती हैं. परदे लगाकर बेडों को क्यूबिकल बनाया गया है, ताकि किसी मरीज़ के कारण दूसरे को और दूसरों के कारण उस मरीज़ में संक्रमण न फैले. क्यों नहीं इस्तेमाल किए गए कोच? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने आरोप लगाया है कि यह दरअसल एक घोटाला है. मुख्यमंत्री .@HemantSorenJMM जी, .@RailMinIndia ने राँची में 540 आइसोलेशन बेड तैयार किया है। इसका उपयोग करिए। झूठी राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप से बाहर आइए। यदि सिर्फ आरोप और झूठ की राजनीति करनी है तो कोई बात नहीं पर यदि राज्य की जनता की चिंता है तो इन संसाधनों का उपयोग कीजिए। कहां हुआ इन कोच का इस्तेमाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड की तो छोड़िए, भाजपा शासित राज्यों में भी इन कोच का इस्तेमाल नहीं किया गया. इनका इस्तेमाल प्रैक्टिकल नहीं है. इस बीच रेलमंत्री पीयूष गोयल ने 3 जून को ट्वीट कर बताया कि रेलवे ने 10 आइसोलेशन कोच वाली एक विशेष ट्रेन दिल्ली सरकार को उपलब्ध करायी है. यह वैसी पहली ट्रेन है, जिसका इस्तेमाल आइसोलेशन वाई के लिए किया जाएगा. दिल्ली सरकार के अनुरोध पर यह विशेष ट्रेन शकूरबस्ती स्टेशन पर लगायी गई है.


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