कोरोना वायरस लॉकडाउन: देश में एक बार फिर लॉकडाउन लागू करने की अटकलें लगातार सामने आ रही हैं. क्या फिर से हो सकता है सब कुछ बंद?


देश में एक बार फिर लॉकडाउन लाग करने की अटकलें लगातार सामने आ रही हैं. हालांकि अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री उनसे शहरी कंटेनमेंट ज़ोन में प्रतिबंधों में छूट न देने की बात कह सकते हैं.बच्चों को नहीं लग रहे टीके, बढ़ सकती हैं मुश्किलें देशभर में लागू लॉकडाउन की वजह से 25 मार्च से रुके हुए ज़रूरी टीकाकरण को राजधानी दिल्ली में 6 मई को फिर से शुरू कर दिया गया लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी पिछड़े तबके के परिवारों के बच्चे अब भी इससे वंचित हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक विशेष रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि किस तरह लॉकडाउन की वजह से बच्चों के टीकाकरण में देरी हो रही है और आगे चलकर उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ा ख़तरा भी हो सकता है.


नवंबर में शीर्ष पर हो सकती है कोरोना महामारी भारत में आठ हफ्ते के लॉकडाउन की वजह से कोरोना महामारी के संक्रमण का शीर्ष करीब 34 से 76 दिन आगे बढ़ गया है. लॉकडाउन ख़त्म होने तक संक्रमण के मामलों में करीब 69 से 97 फ़ीसदी तक गिरावट भी रही है. यह दावा किया एक नई स्टडी में किया गया है. द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह स्टडी इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से बनाए गए एक ऑपरेशन रिसर्च युप ने की है.


विमान कंपनियों को 50 फ़ीसदी फ्लाइट्स के साथ ऑपरेट करने का सुझाव लॉकडाउन की वजह से सुस्त हुई अर्थव्यवस्था को और खोलने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक और कदम उठाया है. नागरिक विमानन मंत्रालय ने विमान कंपनियों से घरेलू यात्राओं के लिए विमानों की संख्या 50 फ़ीसदी तक बढ़ाने के लिए कहा है. बिजनेस स्टैंडई की एक ख़बर के मुताबिक, 25 मई से शुरू हुई विमान सेवाओं में केंद्र सरकार ने एयरलाइंस को सिर्फ 33 फ़ीसदी फ्लाइट के साथ ऑपरेट करने के लिए कहा था. हालांकि अब इसे बढ़ाकर 50 फ़ीसदी करने को कहा गया है. इंडस्ट्री सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा कि इंडिगो और एयर इंडिया के अलावा बाकी एयरलाइंस ने डिमांड कम होने की बात कही है. उन्होंने यात्रियों की चिंताओं, कई राज्यों में कुछ हिस्सों पर लगे प्रतिबंध को भी उन मुद्दों में गिनाया है जिनकी वजह से फ्लाइट्स की डिमांड कम है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "करीब 20 दिनों के ऑपरेशन के बाद हमने देखा है कि सफर आसान है. सभी प्रोटोकॉल ये साबित करते हैं कि हवाई सफ़र सुरक्षित है. इसलिए ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया जा सकता है."