बहुचर्चित फरार आरोपी का अब तक नहीं कोई सुराग पुलिस थाना सारणी आरोपी को तलाषने में नाकाम बैतूल।

 


बैतूल। सारणी। करोड़ो रूपए के चिट फंण्ड कांड बैतूल जिले में हुए,


6 माह में राषि डबल करने का झांसा देकर बैतूल की जनता को आयुष टेक्नोलाजी ने लूट डाला कई परिवार बर्बाद हो गए पुलिस ने कार्यवाही करी लेकिन आम जनता को उसका पैसा वापस मिलता नहीं दिख रहा हैं। जमानत पर रिहा होने के बाद से मुख्य आरोपी फरार हैं बाकी आरोपी मुकदमा भुगत रहे हैं। कानून और न्याय का असली सवाल यह हैं कि कंपनी आयुष टेक्नोलाजी में निवेष करने वालो को उनका पैसा आखिर वापस मिलेगा कैसे? पुलिस थाना सारणी के अपराध क्र0 292/13 में आयुष टेक्नोलाजी के संचालक संतोषदास एवं मंतोष दास एवं उनके सहयोगी हरिराम बोडखे, मुकेष बाला, अनवर हुसैन द्वारा धोखाधड़ी व षडयंत्र करके आम जनता को कम समय में पैसा दुगुना करने का लालच दिया गया था। कुछ लोगो को धन दुगुना मिला भी हैं। जब पैसा मिलना बंद हो गया तो पुलिस के पास षिकायत पहुंची और अपराध दर्ज हो गया। पुलिस ने मप्र निक्षेपको का संरक्षण कानून 2000 की धारा 3(4), 6 (2) एवं भारतीय दण्ड विधान की धारा 406, 420, 120 (बी) का 23.07.2013 को मामला दर्ज करके तहकीकात के बाद अदालत में पेष कर दिया था। हाई कोर्ट से जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी संतोष दास फरार हो गया तो मंतोष दास की मृत्यु हो चुकी हैं। बाकी सहयोगी आरोपी अदालत में कानून और न्याय की प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। अदालत में मामला चलते हुए 6 वर्ष गुजर चुके हैं। सारणी एवं पाथाखेड़ा की जनता को निवेष किया गया लाखों रूपए मिलने का इंतजार हैं लेकिन आरोपी के फरार होने के कारण पैसा कौन लौटायेगा इसका कुछ भी पता नहीं हैं। अदायगी तो करोड़ो रूपए की हैं लेकिन पुलिस जप्ती कुछ लाखों में हैं तो पैसा वापसी की कोई उम्मीद नहीं हैं। अदालत में चल रहा मामला तो दांडिक हैं लेकिन रकम वापसी का कोई मामला किसी अदालत में नहीं चल रहा हैं। मप्र निक्षेपकों का संरक्षण कानून 2000 का कोई भी मामला राजस्व न्यायालय में पेष नहीं हुआ था इसलिए भी रकम वापसी की कोई उम्मीद नहीं हैं। जिला प्रषासन ने निवेषको की रकम वापस दिलवाने की दिषा में कोई वैधानिक कार्यवाही भी नहीं की थी तथा निवेषको ने पुलिस के अतिरिक्त अन्य कोई षिकायत जिला प्रशासन से भी नहीं की थी। पुलिस थाना सारणी के द्वारा फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास ही नहीं किए गए हैं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर निवेशकगण बताते हैं कि आरोपी संतोष दास का परिवार तो पाथाखेड़ा में हैं लेकिन वह अपनी दूसरी पत्नी के साथ फरार हैं। जाहिर हैं कि आरोपी को आर्थिक मदद उसके माता पिता से मिल रहीं हैं, समय समय पर पैसा पहुंच रहा हैं तब तो वह किसी दूसरे स्थान पर पत्नी एवं बच्चे के साथ जीवन यापन कर रहा हैं। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी का परिवार अक्सर किसी न किसी कारण से भोपाल आता जाता रहा हैं। आरोपी के माता पिता के मोबाईल नम्बर पर उसकी बात भी होती होगी। आरोपी के पिता श्यामलदास के पास बगडोना क्षेत्र में कुछ प्लाट हैं लेकिन निवेषको की नजर उस पर बनी हुई हैं इसलिए बेच नहीं पा रहे हैं। आरोपी का पिता श्यामलदास अपने पुत्र की मदद के लिए किस बैंक के माध्यम से बड़ी धनराषि का अंतरण किस खाते में समय समय पर करता रहता हैं इस संबंध में कोई जानकारी पुलिस को भी नहीं हैं। आरोपी संतोष दास पर फर्जीवाड़े का एक मामला महाराष्ट्र राज्य के चंद्रपुर में भी चल रहा हैं जिसमें सहयोगी अपराधी अदालत में मुकदमा भुगत रहे हैं बाकि संतोष दास तो फरार हैं। आरोपी शातिर हैं, चालाक और चतुर हैं जिसके सामने पुलिस तो भोंदू साबित हो रहीं हैं। पुलिस को इंतजार हैं कि एक न एक दिन आरोपी लौटकर बैतूल आयेगा तो वह पकड़ा जायेगा। पुलिस की भूमिका पर सवाल तो उठ रहे हैं कानून के हाथ लंबे और मजबूत हैं यह तो केवल एक कहावत साबित हो रहीं हैं। असली सवाल तो यही हैं कि निवेशकगणों को उनका पैसा मिल पाना तो तभी संभव हैं जबकि फरार आरोपी पकड़ा जाए लेकिन पुलिस की उदासीनता तो कई सवाल खड़े कर रहीं हैं।


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