मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और मीडिया विभाग के चेयरमैन श्री जीतू पटवारी की पत्रकार वार्ता

कोरोना से निपटने की बजाय भाजपा का नौकर बन के उनके अनुसार कार्य कर रहा है इंदौर का प्रशासन: जीतू पटवारी


भोपाल,


मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और मीडिया विभाग के चेयरमैन श्री जीतू पटवारी ने आज स्थानीय रेसीडेंसी कोठी के बाहर एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना ने समूचे मध्यप्रदेश में भयानक रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे इंदौर सर्वाधिक प्रभावित हुआ है, यह उल्लेखनीय है कि जिस परिवार का सदस्य कोरोना संक्रमित हो रहा है उसकी पीड़ा को केवल वही परिवार समझ सकता है। अकेले इंदौर में ही कोरोना के कारण अब तक 473 मौतें हो चुकी हैं और यह आधिकारिक आंकड़ा है जो प्रशासन के द्वारा दिया गया है लेकिन वास्तविकता में इससे तीन गुना अधिक मौतें हुई हैं। इंदौर शहर का प्रशासन कोरोना से हो रही मौतों और संक्रमित लोगों की संख्या को सरकार के इशारे पर छुपा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि कोरोना के असली आंकड़ों को छुपाया जाए, जांच की केवल बातें की जाएं, भाषण दिए जाएं, लेकिन वास्तविकता में जांच न की जाए, प्रशासन वैसा ही कर रहा है


यह चिंतनीय है कि लगभग 400 पाजिटिव केसेस इंदौर में रोज आ रहे हैं, इस हिसाब से कांग्रेस पार्टी का अनुमान है की दीवाली तक लगभग 50000 केसेस हो सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकार कोरोना के इलाज के नाम पर डेढ़ लाख रुपए तक, प्रति मरीज, उन चिन्हित अस्पतालों को दे रहे हैं, जिनसे सरकार का एग्रीमेंट है और सरकार उन्हीं अस्पतालों से एग्रीमेंट कर रही है, जिनसे उनका लेनदेन जम रहा है, अन्यथा नहीं। यदि अस्पताल और सरकार का एग्रीमेंट हो जा रहा है तो जनता के पैसों को सरकार और अस्पताल मिलकर लूट रहे हैं और अगर समझौता नहीं हो रहा तो निजी अस्पताल जनता को सीधे लूट रहे हैं। सांवेर के प्रत्याशी और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू जो कोरोना से लड़ाई लड़ चुके हैं, वह स्वयं और मेरे चाचा भी निजी अस्पतालों की इस लूट का शिकार हो चुके हैं, आम आदमी के हालात का तो आप केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं।


सरकार ने निजी अस्पतालों को लूट की छूट दे रखी है। निजी अस्पताल 5 लाख या उससे अधिक में इलाज कर रहे हैं और सरकार ने डेढ़ लाख रुपए प्रति मरीज निर्धारित किए हैं, ऐसा क्यों? बिलों में अंतर का अनुपात इतना अधिक क्यों है? पूरी प्रक्रिया पर जिला प्रशासन ने आंख क्यों मूंद रखी है? सरकार को सांप क्यों सूंघ गया है? हमारी इंदौर लोकसभा से एकमात्र मंत्री जो हैं, वो कोरोना के आने पर बेंगलुरु भाग गए थे, वह अब जनता से किस मुंह से वोट मांगने आए हैं? क्या प्रदेश में कोरोना लाने के जिम्मेदार असली और एकमात्र विलेनष् उस मंत्री को सांप सूंघ गया है, जो अस्पतालों की लूट पर खामोश बने हुए हैं? कहीं इस लूट में उनका भी हिस्सा तो नहीं है! आप लोग इस लूट को समझ रहे हैं, हमारी प्रशासन से मांग है कि वह इस लूट को अतिशीघ्र रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। प्रदेश के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं, इंदौर की स्थिति तो और भयावह है। आने वाले दिनों में लोग अस्पतालों और इलाज के अभाव में सड़कों पर मरने के लिए मजबूर हो सकते हैं। ऐसे में इंदौर जिला प्रशासन क्यों आंख मींचे हुए है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपायों के लिए जन जागरूकता फैलाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए प्रशासन क्या कर रहा है? यह शर्मनाक है कि कलश यात्रा के माध्यम से महिलाओं व बच्चियों को साड़ी वह हंडे का लालच देकर उनके घरों में भी कोरोना फैलाया रहा है। इस पर प्रशासन खामोश क्यों है? प्रशासन भाजपा के नौकर के रूप में काम कर रहा है।


दूसरी ओर आपदा प्रबंधन कमेटी में विशेषज्ञों की बजाय भाजपा नेताओं को रख लिया गया है, कांग्रेस के लोगों को भी इस कमेटी से दूर रखा गया है। आपदा की इस घड़ी में भी भाजपा को भेदभाव और राजनीति दिख रही है। जबकि कांग्रेस ऐसे समय में सभी के सहयोग से मिलकर काम करना चाहती है। कलेक्टर को तबादले का डर है। जनप्रतिनिधि होने के बावजूद हमें रेसीडेंसी में पत्रकार-वार्ता नहीं करने दी गई, जबकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है। ये तानाशाही से सरकार चलाना चाहते हैं, कमलनाथ जी ने सही ही कहा है कि अधिकारी अपने पद की गरिमा रखें, पुलिस अपनी वर्दी की इज्जत करे, अन्यथा समय बदलते देर नहीं लगती, हम आपको डरा नहीं रहे हैं लेकिन आपके कर्तव्यों और नैतिकता की ओर ध्यान दिला रहे हैं। यह आश्चर्यजनक और अनुचित है कि एक तहसीलदार द्वारा विधायकों को रेसीडेंसी में पत्रकार-वार्ता लेने से रोका जा रहा है, इंदौर प्रशासन का रवैया भाजपा के नौकरों जैसा है, वह पद पर बने रहने के लिए भाजपा का नौकर बनने में गर्व महसूस कर रहे हैं, मैं संयमित शैली लेकिन उग्र भाव से प्रशासन को आगाह कर देना चाहता हूं कि पुलिस द्वारा सांवेर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लगाए गए 500 मुकदमे ज्यादती की हद हैं, जिन अधिकारियों ने ये अन्याय किया है, वे अपने नाम स्वयं नोट कर लें कि उन्होंने ठीक नहीं किया है। यह भी आश्चर्यजनक है कि सांवेर में रोज निकलने वाली यात्राओं पर कार्यवाही नहीं की जाती लेकिन पार्षद पर रासुका लगा दी जाती है, यह कौन सा धर्म है? शर्म आनी चाहिए, दोनों जगह समान कार्यवाही होना चाहिए थी। कोविड का जो चार्ट बना उसमें धर्म का कालम लिखा गया, यह शर्मनाक है। आपकी यह सोच, यह विचार कहता है कि आप पापी हो और पापियों को सजा जनता देगी


कलेक्टर ने कहा था कि बाहर से यानी विदेश से जो 3000 भारतीय वापस आए, उनसे कोरोना फैला, अब उस 3000 में से 1000 लोग मिल ही नहीं रहे, कहां गए वो लोग! क्या यही इनकी सजगता है? क्या इसीलिए ये अपनी पीठ थपथपाते हैं! अखबारों पर प्रशासन अपने हिसाब से खबरें छपवाने का दबाव बनाता है, क्या यह प्रशासन का काम है, आप अच्छी तरह समझते हो कि कोरोना काल में जो यातना आप लोग भोग रहे हो. उसके असली जिम्मेदार कौन हैं? मेघदूत और चिड़ियाघर खोलने की कोशिशों में लगे प्रशासन से मैं अभी भी आग्रह करता हूं कि यह महामारी, जो आगामी दिनों में भीषण रूप लेने वाली है, उससे इंदौर को बचाने की आवश्यक तैयारियां की जाएं, जनता भी प्रशासन के भरोसे न रहकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करे व अपने और अपने परिवारजनों को कोरोना के हमले से बचाने की हर मुमकिन कोशिश करे। एक प्रश्न के जवाब में श्री पटवारी ने कहा कि हम कैलाश विजयवर्गीय की तरह शहर को जलाने की बात नहीं कह सकते, हम जोड़ने वाली विचारधारा के लोग हैं, तोड़ने वाली नहीं।' पत्रकार वार्ता को पूर्व सांसद व सांवेर विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी श्री प्रेमचंद गुड्डू, श्री संजय शुक्ला व श्री विनय बाकलीवाल ने भी संबोधित किया। श्री प्रेमचंद गुड्डू ने जहां सांवेर से अपनी जीत का विश्वास व्यक्त किया वहीं विधायक श्री संजय शुक्ला ने जनता के अधिकारों के लिए आगे भी लड़ाई जारी रखने की बात कही। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्री विनय बाकलीवाल ने प्रशासन से मांग की कि वे स्कूलों को इस बात के निर्देश जारी करें कि कोरोना काल के गंभीर संकट के समय छात्रों की फीस माफ की जाये


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