लॉकडाउन के छह दिनों में गई 20 लोगों की जान - जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ है, तब से इन दुर्घटनाओं में बड़े तौर पर प्रवासी मजदूर ही मर रहे हैं


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है. दुकानों से लेकर सभी तरह की गतिविधियों पर रोक लगने के कारण प्रवासी मजदूरों के लिए अपने रोज़ाना के खर्चों को निकालना बेहद मुश्किल हो गया है. उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे कई राज्यों के मज़दूर देश के अलग-अलग हिस्सों में कमाने-खाने के मकसद से जाते हैं. लेकिन सबकुछ बंद बंद हो जाने से तकलीफ़देह हालात में प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस लौट रहे हैं. कामकाज और कमाई बंद होने के चलते इनके पास अपने घरों के लिए वापस लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. सरकारी बसें, ट्रेनें सब बंद हैं. निजी गाड़ियां चल नहीं रही हैं. ऐसे में पिछले कुछ दिनों से देशभर से परेशान करने वाली ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जिनमें प्रवासी मजदूर सैंकड़ों किमी पैदल चलकर अपने घरों को जा रहे हैं.प्रवासी मजदूरों में भगदड़ मची हुई है. वे बस अड्डों पर बड़ी भीड़ के रूप में दिखाई दे रहे हैं. ये मजदूर किसी भी हालत में बड़े शहरों से निकलकर गांवों और कस्बों में अपने घरों पर वापस जाना चाहते हैं. बीबीसी के मीडिया रिपोर्ट्स पर कराए गए एक विश्लेषण के मुताबिक, लॉकडाउन के ऐलान के बाद से सड़क हादसों के 4 मामले सामने आए हैं. बहुत ज्यादा पैदल चलने की वजह से मेडिकल इमर्जेंसी के 2 मामले देखे गए हैं और अन्य प्रकार की घटनाओं का एक मामला सामने आया है.


सड़क हादसे इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 27 मार्च को हैदराबाद के पेड्डा गोलकोंडा के पास हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में तेलंगाना के प्रवासी मजदूर थे और इनमें दो बच्चे भी शामिल थे. ये लोग कर्नाटक में अपने घरों को वापस जा रहे थे. ये एक खुले ट्रक में यात्रा कर रहे थे. इस ट्रक को पीछे से आ रही एक लॉरी ने टक्कर मार दी.



मेडिकल इमर्जेंसी 26 मार्च को 39 साल के एक शख्स की मौत मध्य प्रदेश के मुरैना में अपने घर जाते वक्त रास्ते में हो गई. रणवीर सिंह दिल्ली में बतौर फूड डिलीवरी बॉय का काम करते थे. वह दिल्ली से मुरैना में अपने घर के लिए पैदल ही चल पड़े थे. दिल्ली से मुरैना की दूरी करीब 300 किमी है. बीच रास्ते में आगरा में वह गिर पड़े और उनकी मौत हो गई. 27 मार्च को गुजरात के सूरत में 62 साल के गंगाराम की मौत हो गई. गंगाराम एक हॉस्पिटल से अपने घर की ओर पैदल जा रहे थे जो कि करीब 8 किमी दूर था. उन्हें घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला और उन्हें पैदल जाने का फैसला करना पड़ा. पंडेसारा में अपने घर के पास सड़क पर वह बेहोश होकर गिर गए. उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. हर घटना की कम से कम दो मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए पुष्टि की गई है.


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