मोदी सरकार के सरंक्षण में चोरों का संवर्धन!*

*(कल्पना बर्मन)


मोदी सरकार के सरंक्षण में चोरों का संवर्धन!*


प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने आरबीआई से विलफुल डिफॉल्टर(जिसने खुद को दिवालिया घोषित करने का आवेदन दिया)की कर्जमाफी(राइट ऑफ)को लेकर जानकारी मांगी जिसका जवाब आरबीआई के सूचना अधिकारी अभयकुमार ने दिया है वो आपको जानना जरूरी है।


RBI ने टॉप 50 विलफुल डिफॉल्टर्स का 68,607 करोड़  रुपये माफ करना स्वीकार किया है।सरकार कह सकती है कि आरबीआई एक स्वायत्त संस्था है मगर जब सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये का रिज़र्व निकालना हो तो आरबीआई की आपत्ति को दरकिनार करके निकाल सकते है!


अभयकुमार की अर्जी के जवाब में आरबीआई ने कहा कि इस 68607 करोड़ रुपये की इस राशि को तकनीकी रूप से और विवेकपूर्ण तरीके से  30 सितंबर, 2019 तक माफ कर दिया गया है।तकनीक व विवेक का मामला तो आप समझ ही रहे होंगे!


50 शीर्ष विलफुल डिफाल्टर्स की इस सूची में मेहुल चोकसी की भ्रष्टाचार में फंसी कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड शीर्ष पर है, जिसके ऊपर 5,492 करोड़ रुपये की देनदारी है।इसके अतिरिक्त समूह की अन्य कंपनियां, गिली इंडिया लिमिटेड और नक्षत्र ब्रांड्स लिमिटेड हैं, जिन्होंने क्रमश: 1,447 करोड़ रुपये और 1,109 करोड़ रुपये लोन लिए थे और आरबीआई ने विवेकपूर्ण फैसला लेते हुए माफ कर दिया है।सरकार मेहुल चौकसे और नीरव मोदी को तकनीकी रूप से लाने को प्रयासरत है उससे पहले विवेकपूर्ण निर्णय से मार्ग साफ कर दिया गया है!


इस सूची में दूसरे स्थान पर आरईआई एग्रो लिमिटेड है, जिसने 4,314 करोड़ रुपये के कर्ज लिए थे।इसके निदेशक संदीप झुनझुनवाला और संजय झुनझुनवाला एक साल से अधिक समय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं।झुनझुनवाला का झुंझुना तकनीक के बल पर खत्म कर दिया गया है!


सूची में अगला नाम भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की विनसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी का है, जिसने 4076 करोड़ रुपये कर्ज ले रखे हैं, और केंद्रीय जांच ब्यूरो विभिन्न बैंक धोखाधड़ी के लिए इसकी जांच कर रही है।सीबीआई जांच करते-करते मंजिल तक पहुंचेगी तब पता चलेगा कि विवेकपूर्ण फैसला पहले ही हो चुका है।


दो हजार करोड़ रुपये की श्रेणी में अर्थात 2000करोड़ रुपये से ज्यादा के जिन कर्ज पर तकनीक का प्रयोग हुआ है उसमें  कानपुर स्थित रोटमैक ग्लोबल प्रा.लि. शामिल है, जो प्रसिद्ध कोठारी समूह का हिस्सा है, और इसने 2,850 करोड़ रुपये कर्ज ले रखे है।उसके बाद कुदोस केमी, पंजाब (2,326 करोड़ रुपये), बाबा रामदेव और बालकृष्ण के समूह की कंपनी रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इंदौर (2,212 करोड़ रुपये), और जूम डेवलपर्स प्रा.लि., ग्वालियर (2,012 करोड़ रुपये) का नाम है जिसका कर्ज विवेक का प्रयोग करते हुए माफ कर दिया है।


तकनीक की बुनियाद पर विवेक के ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करते हुए एक हजार करोड़ रुपये कर्ज वाली श्रेणी में 18 कंपनियों का कर्ज माफ किया गया हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख नाम हरीश आर. मेहता की अहमदाबाद स्थित फॉरएवर प्रीसियस ज्वेलरी एंड डायमंड्स प्रा.लि. (1962 करोड़ रुपये), और भगोड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या की बंद हो चुकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड (1,943 करोड़ रुपये) शामिल हैं।


इसके अलावा अभयकुमार ने गोखले की अर्जी का जवाब देते हुए बताया है कि 25 कंपनियां ऐसी है जिनके ऊपर एक हजार करोड़ से कम का कर्ज बकाया हैं।ये 605 करोड़ रुपये से लेकर 984 करोड़ रुपये तक के हैं।ये कर्ज या तो व्यक्तिगत तौर पर लिए गए हैं, या समूह की कंपनियों के रूप में,जिसको तकनीक व विवेक के बल पर माफ कर दिया।


गौर करने वाली बात यह है कि ये जितने भी डिफाल्टर है उसमें से एक भी संवैधानिक आरक्षण वाला नहीं है अर्थात ओबीसी/एससी/एसटी माइनॉरिटी कोटे के तहत फायदा उठाने वाले नहीं है!जीडीपी के सांड को इनके कंधो पर उठाकर चलाया जा रहा था वो पूंजी 100%इस देश के किसान-कामगारों के श्रम से निर्मित पूंजी ही थी जिसको लुटाकर विवेकपूर्ण निर्णय लिया गया है।


पाखंड व अंधविश्वास में लिपटी जनता हिन्दू-मुस्लिम से बाहर निकलकर तकनीक का उपयोग करते हुए विवेकपूर्ण सोचने लग जाएं तो यह शीर्ष स्तर की फर्जी तकनीक व अन्यायपूर्ण विवेक पर लगाम लगाई जा सकती है।मीडिया इस पर डिबेट नहीं करेंगे व अखबार बड़े-बड़े संपादकीय छापकर आपको नहीं बताएंगे क्योंकि इस कर्जमाफी के तकनीकी व विवेकपूर्ण फैसले की सूची में कई मीडिया समूहों के शेयर होल्डर भी शामिल है!