बिक रहा है पानी पवन बिक न जाए


(दुर्गेश शर्मा - लेखक म.प्र. कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता है)


किसी कवि ने क्या खूब लिखा है


बिक रहा है पानी पवन बिक न जाए


बिक गयी है धरती गगन बिक न जाए


चाँद पर भी बिकने लगी है जमीं


डर है की सूरज की तपन बिक न जाए


हर जगह बिकने लगी है स्वार्थ नीति


डर है की कहीं धर्म बिक न जाए


देकर दहेज ख़रीदा गया है अब दुल्हे को


कही उसी के हाथों दुल्हन बिक न जाए


 हर काम की रिश्वत ले रहे अब ये नेता


कही इन्ही के हाथों वतन बिक न जाए


सरे आम बिकने लगे अब तो सांसद और विधायक


डर है की कहीं संसद भवन और विधानसभा बिक न जाए


मरा तो भी आँखें खुली हुई हैं


डरता है मुर्दा कहीं कफ़न बिक न जाए !!!


Popular posts
भगवान पार ब्रह्म परमेश्वर,"राम" को छोड़ कर या राम नाम को छोड़ कर किसी अन्य की शरण जाता हैं, वो मानो कि, जड़ को नहीं बल्कि उसकी शाखाओं को,पतो को सींचता हैं, । 
Image
राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने प्रदेशवासियों को ईद उल फितर की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी
Image
एक ऐसी महान सख्सियत की जयंती हैं जिन्हें हम शिक्षा के अग्रदूत नाम से जानते हैं ।वो न केवल शिक्षा शास्त्री, महान समाज सुधारक, स्त्री शिक्षा के प्रणेता होने के साथ साथ एक मानवतावादी बहुजन विचारक थे। - भगवान जावरे
Image
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर साहू समाज" घोड़ा निक्कास भोपाल  में "मां कर्मा देवी जयंती" के शुभ अवसर पर भगवान का फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया।
Image
कान्हावाड़ी में बनेगी अनूठी नक्षत्र वाटिका, पूर्वजों की याद में लगायेंगे पौधे* *सांसद डीडी उइके एवं सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नागर ने कान्हावाड़ी पहुँचकर किया स्थल निरीक्षण
Image