पहले "माफ करो महाराज,हमारा नेता शिवराज" अब दोनों "हमराज" साथ-साथ...के के मिश्रा


मप्र में 25 उपचुनावों की आहट के बीच आज से दोनों "धनसेवकों" (जनसेवक नहीं) की राजनैतिक यात्रा शुरू! दोनों ने एक दूसरे को क्या-क्या नहीं कहा था.... शिवराज ने कभी "विभीषण, कभी आजादी संग्राम के गद्दार,तो कभी वीरांगना लक्ष्मीबाई का हत्यारा"! तो महाराज ने शिवराज को बताया था "किसानों का हत्यारा"! .....


आज से ये दोनों गद्दारों और


बिकाऊओं के लिए वोट मांगेंगे?....इससे इतर आज दोनों ही लालची धनसेवकों ने ईमानदार राजनैतिक मूल्यों-आदर्शों को समर्पित,राजनैतिक संत स्व.कैलाश जोशी जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया !! शायद इस बेमेल राजनैतिक, अनैतिक व स्वार्थी वैचारिक गठजोड़ को लेकर स्व.कैलाश जोशी जी की आत्मा आज रो रही होगी कि, ताजिंदगी जो मैंने अपने ईमानदारीपूर्ण व्यतीत जीवन में कभी सोचा भी नहीं होगा,वह मरणोपरांत आज महसूस कर रहा हूँ!!* *कोरोना के डरकर घरों में कैद अब 90 दिनों बाद जनाब आज प्रकट हुए,अपने चहेतों को मलाईदार विभागों को दिलवाने के लिए वक्त था, जनता के आंसू पोंछने का नहीं? कांग्रेस से जवाब बाद में मांगना पहले 27 जुलाई को कमलाराजे ट्रस्ट की करोड़ों रु.के जमीन घोटाले का हाईकोर्ट में जवाब दे दीजिएगा "श्रीअंत"* *सादर* *के.के.मिश्रा*