देश और मध्यप्रदेश में कोरोना की चिंताजनक हालात के लिए प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश भाजपा जिम्मेदार सरकार गिराना महत्वपूर्ण था न कि कोरोना की रोकथाम पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने वीडियों कांफ्रेंसिंग पत्रकारवार्ता में दी जानकारी- भूपेंद्र गुप्ता


देश और मध्यप्रदेश में कोरोना की चिंताजनक हालात के लिए
प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश भाजपा जिम्मेदार
सरकार गिराना महत्वपूर्ण था न कि कोरोना की रोकथाम
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने वीडियों कांफ्रेंसिंग पत्रकारवार्ता में दी जानकारी


भोपाल 


पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी ने कहा है कि केन्द्र सरकार और भाजपा को विष्व की सबसे भीषणतम महामारी कोरोना की कितनी चिंता थी इसके लिए 8 मार्च से 24 मार्च तक के घटनक्रम महत्वपूर्ण है। कोरोना से देष को बचाने की चिंता तब हुई जब 20 मार्च को मैंने इस्तीफा, 23 मार्च को षिवराज सिंह चैहान ने प्रदेष में शपथ ली तब जाकर 24 मार्च को देष व्यापी लाॅक डाउन करने की घोषणा हुई। जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधीजी ने 12 फरवरी को कोरोना बीमारी की भयावहता और उसको लेकर भारत में की जा रही लापरवाही की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण था मध्यप्रदेष की सरकार को गिराना न कि कोरोना की रोकथाम करना।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने आज भोपाल में वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई पत्रकार वार्ता में मध्यप्रदेष की एक चुनी हुई सरकार को गिराने ओर अलोकतांत्रिक तरीके से सरकार को बनाने के लिए प्रदेष सहित देष की जनता की जान को खतरे में डाला इसकी सिलसिले बार जानकारी दी।
आज देष के हालात आखिर ऐसे क्यों बने
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने कहा कि सबसे पहले 12 फरवरी को राहुल गांधी जी ने केंद्र सरकार को कोरोना की महामारी के बारे में आगाह किया था। केंद्र की भाजपा सरकार ने 40 दिन बाद 24 मार्च को लाॅक डाडन घोषित किया। तब तक यह महामारी भारत मंे 175 गुना बढ़ चुकी थी। फरवरी मंे 3 केस थे जो बढ़कर 24 मार्च तक 536 संख्या पर पहुॅच गए।श्री नाथ ने सवाल किया कि आखिर मोदी सरकार ने लाॅक डाउन की 24 मार्च तक प्रतीक्षा क्यों की ? उसका एक मात्र कारण था कि वो फरवरी माह से ही मध्यप्रदेष की कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए काम कर रहे थे। 23 मार्च को मध्यप्रदेष में भाजपा के मुख्यमंत्री ने जब शपथ ली तब 24 मार्च से लाॅक डाउन घोषित किया गया।


मोदी के लिए कोरोना से ज्यादा मध्यप्रदेष सरकार को गिराना महत्वपूर्ण था।
श्री कमलनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए कोरोना की रोकथाम से ज्यादा महत्वपूर्ण मध्यप्रदेष की सरकार को गिराना रहा है। सबसे पहले प्रदेष भाजपा ने अपने केन्द्रीय नेतृत्व के साथ मिलकर 3-4 मार्च को कांग्रेस सरकार गिराने की पहली कोषिष की, जिसमें कुछ कांग्रेस के और कुछ निर्दलीय विधायकों को दिल्ली ले जाया गया। मगर वे इस कोषिष में कामयाब नही हुए। तब दूसरा प्रयास 8 मार्च को तीन चार्टर प्लेन करके कांग्रेस के 6 मंत्रियों सहित 19 विधायकों को बेंगलुरू के रिसोर्ट में रखा गया। फिर 10 मार्च को बीजेपी के एक पूर्व मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष को उन लोगों का इस्तीफा सौंपा। 12 मार्च को ॅभ्व् ने कोरोना को पेंडेमिक घोषित किया अर्थात विष्व की महामारी घोषित कर दिया।
श्री नाथ ने बताया कि मध्यप्रदेष की कांग्रेस सरकार ने 14 मार्च को ही अपने प्रदेष के नागरिकों को इसके बारे में अलर्ट किया और स्कूल, काॅलेज, शाॅपिंग माॅल बंद करने की घोषणा की। 13 और राज्यों ने ऐसी घोषणाएं की थी। उधर राजस्थान, छत्तीसगढ़, उड़ीसा सहित कई राज्यों ने अपने विधानसभा के सत्र स्थागित कर दिए। भाजपा के विधायक और कांग्रेस के भगोड़े विधायक केंद्र के भाजपा नेताओं के आर्षीर्वाद से कर्नाटक की रिसोर्ट में उत्सव मना रहे थें, उधर देष में कोरोना से पहली मौत भी कर्नाटक में हो गई थी। मध्यप्रदेष कांग्रेस सरकार कोरोना से लड़ने की तैयारी में लगी थी और प्रदेष की भाजपा अपनी सत्ता की भूख मिटाने में लगी थी। हमने अपने बजट सत्र का 16 मार्च से शुरू होने का नोटिफिकषन पहले ही जारी कर दिया था। हम कोरोना महामारी की गंभीरता को जानते थे। हमने राज्यपाल के अभिभाषण के तत्काल बाद 16 मार्च को ही सत्र 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया ताकि हम इस गंभीर महामारी के खिलाफ लड़ाई में लग जाएॅ। इसके विरूद्ध भाजपा सुप्रीम कोर्ट गइ। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करता रहा। आखिर में कांग्रेस की सरकार गिरा कर भाजपा ने 23 मार्च को अपना मुख्यमंत्री मध्यप्रदेष में बनवाया और फिर 24 मार्च रात 12 बजे से लाॅक डाउन घोषित किया। मतलब साफ है कि केंद्र की मोदी सरकार ने अपनी सरकार बनवाने के लिए पूरे देष और हमारे प्रदेष की जनता की जान जोखिम में डाल दी।
मध्यप्रदेष के गंभीर हालातों से मैं चिंतित
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ मध्यप्रदेष की चिंताजनक स्थिति के कारण में अपने राज्य और नागरिकों को लेकर बेहद चिंतित हॅॅॅू। यहां के हालात दूसरे राज्यों से बिल्कुल अलग है। प्रदेष में  प्रजातंत्र के नाम पर एक मुख्यमंत्री मात्र हैं। न स्वास्थय मंत्री है, न गृह मंत्री है, मतलब कैबिनेट ही नही है, न ही लोकल बाॅडी है, सब नदारद है। आज इस लड़ाई की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैल्थ डिपार्टमेंट की है। प्रदेष के हैल्थ डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल सेकेट्री सहित 45 से अधिक अधिकारी कोरोना पाॅजिटिव हो गए है। मध्यप्रदेष वह पहला राज्य है, जहाॅ इस जंग में दो डाॅक्टरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इंदौर शहर सबसे ज्यादा प्रभावित है और राजधानी भोपाल दूसरे नंबर पर है। मध्यप्रदेष देष का एकमात्र प्रदेष है जहाॅ जितने मरीज ठीक हुए है लगभग उतनों की ही मृत्यु हो गई है। इस लाॅक डाउन का लाभ तब ही होगा जब हम अधिक से अधिक टैस्ट करांएगें। मध्यप्रदेष में 10 लाख लोगों पर मात्र 55 टेस्ट हो रहे है जो बेहद चिंता जनक है। प्रदेष के 20 जिलों में इस महामारी की पहुॅच हो चुकी है। सबसे बड़ी चिंता किसानों की है। उनकी फसल पक गई है। सरकारी खरीद 25 मार्च को चालू हो जानी थी, अभी तक उसका कुछ पता नही है। रोज कमाकर खाने वालों की चिंता है। उन तक मदद नही पहुॅच रही रही है।


केद्र सरकार को मेरे सुझाव
श्री नाथ ने कोरोना महामारी रोकथाम के लिए केेंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था की जाये कि हमारी सप्लाई चेन न टूटे। जो उत्पादक राज्य हैं वहाॅ उनके उत्पादन को बरकरार रखने की कोषिष होनी चाहिए। देष भर के ज्यादा संक्रमित जिलों की रैपिड मैपिंग हो और वहाॅ रैपिड एंटी बाॅडी टेस्ट अधिक कराए जाएॅ। देष के हर जिले में प्रवासी मजदूरों और छात्रों की मदद के लिए एक केंद्र स्थापित किए जाऐ। उनमें भरोसा जगाया जाए और जो अपने घर जाना चाहते है उन्हें समयबद्ध तरीके से भेजा जाए। मनरेगा के कानून में प्रावधान है कि अगर सरकार उन्हें काम नही दे सकती है तो मुआवजा देना होगा। उन्हें तुरंत मुआवजा दिया जाए। किसानों की रबी फसल की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए तत्परता से कार्यवाही की जाए। जो कोरोना मरीज ठीक हो कर घर जा चुके हैं उनकी कुछ समय के लिए नियमित जाॅच निर्धारित की जाए। साधारण मरीजों को देखने वाले डाॅक्टरों को भी च्च्म् अनिवार्य किया जाए, ताकि वे भी संक्रमण से बचे रहें और बाकी पेषेंट्स भी सुरक्षित रहें।
कांग्रेस पार्टी कोरोना महामारी की रोकथाम की लड़ाई में केंद्र सरकार के साथ है
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आज पूरी दुनिया नोवल कोरोना गंभीर महामारी की चपेट में है। दुनिया के सभी देष सामूहिक रूप से भी और अपने अपने स्तर पर इसका समाधान तलाष रहे हैं। हजारों लोग रोज इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इस महामारी से लड़ाई में केंद्र सरकार के साथ है। हम यह लड़ाई ऊॅचे हौसले से लड़ रहे हैं। सब मिलकर लड़ रहे हैं। सभी दल अपनी पार्टी के दायरे से उठकर एक साथ है। हम हर हाल में सब मिलकर इस लड़ाई केी जीतेंगे।


 


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