जीवनदायनी मनरेगा बनी प्रवासी श्रमिकों का भी सहारा

 पाथाखेड़ा (वीरेंद्र झा )* जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दानिश अहमद खान जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान लाकडाउन लागु होने बाद सभी तरह की गतिविधियां बंद होने के बाद श्रमिको को उनके मूल कार्य छोड़कर अपने घर वापस आना पड़ा। कुछ समय बितने के बाद श्रमिकों को उनकी आजीविका की चिंता हुई, लाकडाउन के बीच वे अपने मूल कार्य पर वापस नही जा सकते थे। इसी बीच सरकार द्वारा 20 अप्रैल से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये मनरेगा अन्तर्गत जल संरक्षण एवं सिंचाई के कार्य प्रारंभ करने की अनुमति दी गयी है। अनुमति प्राप्त होते ही विकासखण्ड की सभी 56 ग्राम पंचायतों में कार्य प्रारंभ कर अकुशल श्रम का कार्य करने वाले श्रमिको को उनकी मांग के आधार पर कार्यो पर नियोजित किया गया। लाकडाउन अवधि में विकासखण्ड घोड़ाडोंगरी की समस्त 56 ग्राम पंचायतों के 8750 परिवारों के 12581 श्रमिकों को कार्य उपलब्ध कराया गया जिससे इस अवधि में 152095 मानव दिवस सृजित हुये। लाकडाउन अवधि में मनरेगा के तहत 225.47 लाख रूपये की मजदूरी श्रमिकों को दी गयी जो उनकी आजीविका का सहारा बनी। वर्तमान में विकासखण्ड घोड़ाडोंगरी में जल संरक्षण एवं सिंचाई के 258 कार्यो पर जिसमें 64 तालाब निर्माण, 33 नदी पुनर्जीवन के कार्य, 35 चैक डेम निर्माण, 80 खेत तालाब निर्माण, 13 मेढ़ बंधान के कार्य तथा शेष अन्य मनरेगा कन्वरजेंस से होने वाले कार्य हैं। इसी अवधि में प्रधानमंत्री आवास के नवीन लक्ष्य के 476 प्रारंभ कार्यो पर भी मस्टर जारी कर श्रमिकों को मजदूरी उपलब्ध करायी जा रही है। गांव के श्रमिकों को कार्य पर जाते देख कुछ प्रवासी परिवार जो अपना कार्य महानगरों से छोड़कर आये थे उनके द्वारा भी मनरेगा के तहत कार्य की मांग की गयी। ऐसे 404 नवीन परिवारों को जाॅबकार्ड दिये गये। इन 404 परिवारों के 1764 लोगो को रोजगार उपलब्ध कराया गया। एक तरफ जहां मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है वहीं ग्रामों में जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु स्थायी संरचनाओं का भी निर्माण हो रहा है जिससे भूजल स्तर में व्यापक स्तर पर सुधार होगा।


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