ग्रामीण आजीविका मिशन मे भ्रष्टाचार की फिर खुली पोल, प्रशिक्षण के नाम पर हुआ घोटाला, एनसीएल सीएसआर मद से मिले 12 लाख डकारे

 सिंगरौली,  । दीनदयाल अंत्योदय योजना मध्यप्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सिंगरौली भ्रष्टाचार का संरक्षित गढ़ बन गया है।



जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली संचालित आजीविका मिशन जैसी शासकीय क्रियान्वयन एजेंसी के जरिये सरकार की मंशा भले ही ग्रामीण भारत की तकदीर बदलने की हो। परंतु सच्चाई यह है कि दीनदयाल अंत्योदय योजना मध्यप्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की सारी जनकल्याणकारी योजनायें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रही हैं। सूत्रों से हासिल जानकारी के मुताबिक एनसीएल सीएसआर मद से सिलाई, बुनाई आदि के प्रशिक्षण हेतु 12 लाख रुपए प्रशिक्षण मद के लिए प्राप्त हुए थे। सुनकर आश्चर्य होगा कि मिशन जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती अंजुला झा तथा जिला प्रबंधक मंगलेश्वर सिंह द्वारा केवल कागजों में प्रशिक्षण संपन्न कराकर सारी रकम डकार ली गई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम अमझर तथा नंदगांव में समूह की महिलाओं की फर्जी सूची तैयार कर उनके नाम से दो बैच मे सिलाई प्रशिक्षण संपन्न होना दर्शाया गया, जिस पर 4 लाख 55 हजार 20 रुपए का व्यय दर्शाया गया। लेकिन वास्तविकता यह है कि इस दौरान न तो लोगों को प्रशिक्षण दिया गया और न ही एक भी रुपए का कार्य आजीविका मिशन के उक्त आला अधिकारियों द्वारा कराया गया। नाटकीय ढंग से केवल कागजों के माध्यम से पूरे खेल को अंजाम दिया गया। इसी प्रकार से ग्राम भरुआ में बैग निर्माण की फर्जी तरीके से समूह की महिलाओं की सूची तैयार कर फर्जी हस्ताक्षर बनवाकर दिनांक 1 मार्च 2020 से 15 मार्च 2020 तक कागजों में प्रशिक्षण संपन्न होना दर्शाया गया है। जिसमें सभी प्रकार के व्यय शामिल करते हुए 1 लाख 36 हजार 50 रुपए का व्यय होना दर्शाया गया है । सूत्रों की मानें तो आजीविका मिशन जिला पंचायत सिंगरौली में पदस्थ जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती अंजुला झा तथा जिला प्रबंधक मंगलेश्वर सिंह द्वारा कूटरचित तरीकों से लगभग 50 लाख रुपए के फर्जी तरीके से केवल कागजों में कई ट्रेड में महिलाओं का प्रशिक्षण संपन्न करा दिया गया है और शासन प्रशासन को बाकायदा प्रशिक्षण की जानकारी भी दी जा रही है कि समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार से जोड़ दिया गया है। सूत्रों ने दावा किया है कि यदि एनसीएल सीएसआर मद से हुए प्रशिक्षण के प्रतिभागियों की जानकारी जुटा कर पूंछतांछ की जाए तो इस पूरे घोटाले से पर्दा उठ सकता है। सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि धरातल पर देखा जाए तो एक भी ऐसा सदस्य नहीं है जो प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कोई रोजगार कर रहा हो। बताते चलें कि करीब दो महीने पहले ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक अंजुला झा के भ्रष्टाचारी कृत्यों से जुड़ा एक वीडियो भी सिंगरौली से लेकर भोपाल तक खूब वायरल हुआ था। अंजुला झा से जुड़े उक्त वीडियो को प्रदेश स्तर के जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों ने भी देखा और जांचा परखा भी। प्रथम दृष्टया ही सारी सच्चाई सभी के सामने आ गई थी। परंतु सरकारिया मशीनरी की सड़ी गली व्यवस्था के कारण भ्रष्टाचार के सामने अभी तक कानून बौना पड़ा हुआ है! उधर जिला प्रशासन की देखरेख मे वीडियो की तथ्यात्मक जांच पड़ताल हुई तथा अंजुला झा पर आरोप भी साबित हुये। अब यह बात अलग है कि मिशन संचालक तथा कलेक्टर राजीव रंजन मीणा द्वारा भ्रष्टाचार जैसे नासूर के विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी! सूत्रों के मुताबिक एनसीएल सीएसआर मद से मिले 12 लाख रूपये को ठिकाने लगाने के लिए जो फर्जीवाड़ा हुआ उसमे जिला पंचायत लेखाधिकारी की भी बड़ी भूमिका बताई जाती है। विभागीय अधिकारियों ने फर्जी तरीकों से अपनी जेबें तो भर लिया परंतु जरूरतमंद लोगों को प्रशिक्षण दिया ही नहीं गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब लोगों को प्रशिक्षण दिया ही नहीं गया तो फिर बेरोजगार कैसे अपना स्वरोजगार स्थापित कर पाएंगे ? दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत गांव गरीब के बीच ग्रामीण भारत को स्वावलंबी बनाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार की मंशा के मद्देनजर आजीविका मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों की कुत्सित कार्यशैली तथा भ्रष्टाचार के खुले असहज खेल का सहज आंकलन करना फिलहाल तो कतई उचित नहीं समझा जाता। लिहाजा लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा के साथ साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर विषय पर नैतिक जिम्मेदारियों को लेकर बड़े सवाल खड़े होना लाजिमी है।


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